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बीमा में 49 फीसदी एफडीआई को मंजूरी

Fri, 25 Jul 2014 10:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला दिल्ली।
ब्यूरो/अमर उजाला दिल्ली। Updated Fri, 25 Jul 2014 10:24 AM IST
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cabinet approves 49 percent fdi in insurance

केंद्र में एनडीए सरकार बनाने के बाद आर्थिक सुधारों की दिशा में मोदी मंत्रिमंडल का यह अहम फैसला है। इसके तहत विदेशी निवेशक भारतीय बीमा कंपनियों में 49 फीसदी तक निवेश कर सकेंगे। हालांकि कंपनियों के प्रबंधन पर भारतीय प्रमोटर का ही नियंत्रण होगा।

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सरकार के इस फैसले से बीमा क्षेत्र में 20000 करोड़ रुपये से लेकर 25000 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है। बृहस्पतिवार को कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब मोदी सरकार के लिए बीमा संशोधन विधयेक को संसद की मंजूरी दिलाना अहम चुनौती होगा। भारतीय बीमा कंपनियों में विदेशी कंपनियां 26 फीसदी तक तो ऑटोमेटिक रूट से निवेश कर सकेंगी। लेकिन 49 फीसदी के लिए विदेेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी लेना होगा। इसके पहले मोदी सरकार ने 10 जुलाई को पेश बजट में एफडीआई सीमा 49 फीसदी बढ़ाने की बात कही थी।
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बीमा इंडस्ट्री को 25 हजार करोड़ रुपये निवेश की उम्मीद

एफडीआई सीमा बढ़ाने के कदम पर मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के सीईओ और एमडी राजेश सूद ने कहा कि सेक्टर को लंबी अवधि के पूंजी जुटाने में काफी मदद मिलेगी। जीवन बीमा कंपनियों को अपना विस्तार करने में भी बूस्ट मिलेगा।केपीएमजी इंडिया के पार्टनर शास्वत शर्मा ने कहा कि इस कदम से विदेशी निवेशक भारत में निवेशक के लिए प्रोत्साहित होंगे। ऐसा अनुमान है कि इस कदम से बीमा क्षेत्र में 20 हजार से लेकर 25 हजार करोड़ रुपये की पूंजी आएगी।आईसीआसीआई लोबांर्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के एमडी और सीईओ भार्गव दासगुप्ता ने कहा कि हमें बीमा संशोधन विधेयक को संसद से मंजूरी मिलने का इंतजार है। जिससे कि बीमा क्षेत्र में कंपनियों के साथ-साथ ग्राहकों को भी फायदा पहुंचेगा।

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प्रमुख बातें-

1-बीमा क्षेत्र में पूंजी आने से विस्तार में तेजी आएगी, जिसका फायदा नए रोजगार के अवसर के रूप में दिख सकता है।

2-विदेशी निवेश और कंपनियां आने से इंडस्ट्री को नई तकनीकी के इस्तेमाल में मदद मिलेगी।

3-भारत में 3-4 फीसदी लोगों तक ही बीमा की पहुंच है। पूंजी आने से ऐसे तक कंपनियों का पहुंचना आसान होगा।

4-बीमा क्षेत्र में एफडीआई लागू होने से पेंशन क्षेत्र में भी एफडीआई सीमा 49 फीसदी तक पहुंच जाएगी, जिससे पेंशन उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा।

5-साल 2008 से बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी निवेश बढ़ाने का प्रस्ताव लंबित है। ऐसे में अब मोदी सरकार के लिए संसद की मंजूरी दिलाना अहम चुनौती होगी।

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