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मुजफ्फरनगर दंगाः हिंसा की भेंट चढ़े उद्योग, 265 करोड़ का फटका

Fri, 20 Sep 2013 09:40 AM IST
अमर उजाला, शामली
अमर उजाला, शामली Updated Fri, 20 Sep 2013 09:40 AM IST
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business loss reach 265 crore in muzzaffarnagar
मुजफ्फरनगर और शामली में हुई हिंसा ने जिले के उद्योग, कारोबार और बाजार को बदरंग कर दिया। इस हिंसा से जिले की औद्योगिक इकाईयों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को 265 करोड़ रुपये का फटका लगा है।
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शामली जिले में करीब 400 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयां हैं। इनमें लोहा, पेपर, बर्तन, रिम-धुरा एक्सल, केमिकल ,कुकर, प्लास्टिक बर्तनों की 150 बडे़ कारखाने हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के मुताबिक इन इकाईयों से प्रतिदिन करीब 20-25 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। करीब 25 हजार से अधिक कर्मचारी-श्रमिक काम करते हैं। पिछले दिनों की हिंसा ने औद्योगिक इकाईयों की कमर ही तोड़कर रख दी।
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आईआईए के संरक्षक और पेपर मिल के एमडी अशोक कंसल ने बताया कि तीन सितंबर को शहर में हुई हिंसा के बाद से फैक्ट्रियों में कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं आ रहे। 40 फीसदी लेबर भी काम पर नहीं आई। रात की शिफ्ट में तो लेबर ने काम करने से ही मना कर दिया है। दस दिनों में एक-दो दिन छोड़कर फैक्ट्री में नाइट शिफ्ट में काम नहीं हो सका। पार्टियों के तैयार ऑर्डर का माल भी नहीं पहुंच सका, जिस कारण पार्टियों की नाराजगी अलग से झेलनी पड़ी। कुछ साल पहले जिले में 10 पेपर मिल थीं, लेकिन मंदी की मार से सब बंद हो रही हैं।
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उद्यमी मोहित जैन ने बताया कि हिंसा के कारण ट्रांसपोर्टर शामली में अपनी गाड़ियां भेजने से कतराए। नतीजतन यहां से न तो माल जा सका ओर न ही कच्चा माल ही बाहर से आ सका। फै क्ट्रियां कच्चे माल के अभाव में कई दिन बंद रही।

 
गुड़ व्यापारी अशोक गोयल और रमेश गुप्ता ने बताया कि शामली में तीन सितंबर की शाम से 10 दिनों तक काम बिल्कुल बंद रहा।

लिसाढ़ का हैंडलूम उद्योग तबाह

लिसाढ़ गांव में हुई हिंसा के चलते यहां लगी करीब 20-25 हैंडलूम इकाईयां तबाह हो गई। इन छोटी हैँडलूम वाले गांव में दरी चादर तैयार कर पानीपत आदि स्थानों पर भेजते थे। हिंसा में सब कुछ बर्बाद हो गया। इनके चलाने वाले गांव से पलायन कर जा चुके हैं।
 
जिले की बड़ी औद्योगिक इकाईयां
पेपर मिल-------2
लोहा मिल-------4
रिम-------5
धुरा-एक्सल-------10
केमिकल-------10
बर्तन-------100
कुकर-------4
प्लास्टिक बर्तन-------5
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