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इस बार खूब सेहत बनाएंगे हिमाचल के सेब
शिमला/ब्यूरो
Updated Thu, 13 Jun 2013 10:45 PM IST
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हिमाचल प्रदेश में सेब की फसल तैयार होने लगी है। इस वर्ष सेब के 3.5 से 4 करोड़ के बीच ही स्टैंडर्ड बक्से सेब उत्पादन होने का आकलन है।
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डेढ़-दो सप्ताह बाद रेड जून, टाइडमैन जैसी जल्दी होने वाले सेब की किस्में बाजार में उतर जाएंगी।
सेब की खरीद के लिए मुंबई, दिल्ली, चंडीगढ़ सरीखे बड़े शहरों की मंडियों के आढ़ती सेब उत्पादन क्षेत्रों में बागवानों से संपर्क कर रहे हैं।
हिमाचल में 3 से 4 हजार करोड़ रुपये का सेब कारोबार है। हालांकि, अधिकतर बागवानों ने केवल मानकीकृत आकार यानी 20 किलो के बक्सों में सेब की बिक्री शुरू नहीं की है।
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यहां 25 से 28 किलो तक के बड़े आकार के बक्सों में ही पैकिंग होती है। इस बार ऐसे प्रचलित बक्से तकरीबन तीन करोड़ होने की उम्मीद है। स्टैंडर्ड आकार में इनका साढ़े तीन से लेकर 4 करोड़ बक्से होने का आकलन है।
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पहले इससे अधिक उत्पादन का अनुमान था, मगर मई और अब जून महीने में ड्रॉपिंग से काफी नुकसान हुआ है। हिमाचल में सर्वाधिक परंपरागत रॉयल किस्म के सेब की ही पैदावार होती है। अब विदेशों से आयातित अन्य स्वादिष्ट किस्मों का उत्पादन भी हो रहा है।
प्रदेश के प्रधान सचिव (बागवानी) तरुण श्रीधर ने बताया कि हिमाचल सेब सीजन के लिए तैयार है। उनके अनुसार इस बार अनुमान है कि सेब का कुल उत्पादन पिछले साल से लगभग दोगुना होगा। गत वर्ष तकरीबन दो करोड़ बक्से हुए थे। यानी इस बार चार करोड़ तक स्टैंडर्ड आकार बक्से होने की उम्मीद है।
मशहूर है शिमला, कुल्लू व किन्नौर के सेब
हिमाचल में सेब की सर्वाधिक पैदावार शिमला जिले में होती है। प्रदेश में 60 से 70 फीसदी तक सेब उत्पादन यहीं होता है। इसके अलावा कुल्लू और किन्नौर भी प्रमुख सेब उत्पादक जिले हैं। इन तीनों ही जिलों के सेबों की देशभर में अपनी खास पहचान है। चंबा, सिरमौर, मंडी और कांगड़ा के कुछ क्षेत्रों में भी सेब होता है। बिलासपुर जैसे गरम जिले में भी कुछ बागवानों ने रेड जून जैसी किस्में उगाने के सफल प्रयोग किया है।
ज्यादा फसल से प्रभावित हो सकते हैं रेट
ज्यादा फसल होने से सेब के रेट भी प्रभावित हो सकते हैं। सेब के रेट फसल की गुणवत्ता, आपूर्ति, मांग आदि पर तय होते हैं। अमेरिका, चीन से आयातित सेब का भी प्रभाव रहेगा। पिछले साल सेब की अगौती किस्मों का एक बाक्स अधिकतम 4,200 रुपये में बिका।
बाद में आपूर्ति बढ़ी तो रॉयल सेब किस्म को 1,200 से 1,500 रुपये रेट ही मिले। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त बागवान रामलाल चौहान ने बताया कि फसल गत वर्ष से अगर दोगुनी है, तो रेट पर भी असर पड़ेगा। शुरुआती रेट हर साल ही अच्छे रहते हैं।