फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   broadband plans for rural india may hampered

गांव-गांव ब्रॉडबैंड की योजना को लगेगा झटका

Mon, 29 Sep 2014 09:00 AM IST
प्रशांत श्रीवास्तव/नई दिल्ली
प्रशांत श्रीवास्तव/नई दिल्ली Updated Mon, 29 Sep 2014 09:00 AM IST
विज्ञापन
broadband plans for rural india may hampered

अगले तीन साल में देश की 2.5 लाख ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड सेवाएं पहुंचाने की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को झटका लग सकता है। ऐसा इसलिए है कि ब्रॉड बैंड सेवाएं पहुंचाने की योजना को अमल में लाने का जिम्मा जिन एजेंसियों के पास है, उनमें कई अहम सरकारी पद खाली पड़े हैं। ऐसे में टेंडर आदि की प्रक्रिया धीमी हो गई है। मोदी सरकार को सत्ता में आए करीब चार महीने बीत चुके हैं। इसके बावजूद अहम पदों पर नियुक्तियां न होने से फैसले लेने की गति में तेजी नहीं आ रही है।

विज्ञापन


मोदी सरकार की चालू वित्त वर्ष में 50 हजार गांवों और अगले दो वित्त वर्ष में एक-एक लाख गांवों तक ब्रॉडबैंड सेवाएं पहुंचाने की योजना है। इसके लिए भारत ब्रॉड बैंड नेटवर्क लिमिटेड (बीबीएन) कंपनी को योजना को अमल में लाने की अहम जिम्मेदारी मिली है। पर आलम यह है कि कंपनी के लिए अभी तक सरकार के तरफ से स्थायी चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) की नियुक्ति नहीं हुई है।
विज्ञापन


करीब 21,000 हजार करोड़ रुपये के नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (एनओएफएन) प्रोजेक्ट के 70 फीसदी काम की जिम्मेदारी भारत संचार निगम लिमिटेड के पास है। जहां कंपनी के पास स्थायी सीएमडी नहीं है, वहीं डायरेक्टर फाइनेंस जैसे अहम पद खाली हैं। सीएमडी के लिए कंपनी में अतिरिक्त चार्ज के रूप में जिम्मेदारी डायरेक्टर स्तर के अधिकारी को दी गई है। ऐसा ही हाल डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (डीओटी) का भी है, जहां मेंबर टेक्नॉलजी जैसे अहम पद खाली है, जिनकी इस योजना को लागू करने में अहम भूमिका होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


डीओटी के सूत्रों के मुताबिक अहम पदों पर स्थायी नियुक्ति न होने से फैसले लेने में देरी हो रही है। इसका असर टेंडर आदि जारी करने में भी हो रहा है। अधिकारी के मुताबिक सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 50 हजार गांवों तक ब्रॉड बैंड नेटवर्क पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसे पूरा करने में केवल 6 महीने का समय बचा है। फैसलों में देरी का असर पूरे प्रोजेक्ट पर पड़ने की आशंका है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed