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स्वास्थ्य बीमा में शामिल हो मोटापा सर्जरी

Mon, 04 Aug 2014 11:10 AM IST
Updated Mon, 04 Aug 2014 11:10 AM IST
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British surgeon wants insurance companies to include obesity surgery in claims
ब्रिटेन के एक विख्यात सर्जन का कहना है कि दक्षिण एशिया में मोटापा कम करने की सर्जरी को कॉस्मेटिक सर्जरी के दायरे से बाहर निकाल कर स्वास्थ्य बीमा कवर में शामिल करना चाहिए।
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अगर ऐसा होता है तो मोटापे के शिकार लोगों को स्वास्थ्य बीमा के कवर के तहत ही मोटापा कम करने की सर्जरी यानी बेरियाट्रिक सर्जरी कराने की सहूलियत मिल जाएगी। अभी तक बेरियाट्रिक सर्जरी को कॉस्मेटिक सर्जरी की श्रेणी में रखा जाता है जिस पर मेडिकल इन्श्योरेंस का कवर नहीं मिलता।
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ब्रिटेन के सुंदरलैंड रायल हॉस्पिटल के मानद कंसल्टेंट सर्जन डॉ. कमल कुमार महावर ने मोटापे से निपटने के लिए अहम सुधारों की वकालत की है। महावर का कहना है कि बॉडी कंटेंट एनालाइजर (BMI) का इस्तेमाल करते हुए मोटापे की सटीक पहचान की जानी चाहिए, क्योंकि दक्षिण एशिया के लोगों में मोटापे की पहचान करने में बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) भरोसेमंद साबित नहीं हो रहा है।
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डॉ. महावर ने भारतीयों में मोटापे और इससे जुड़े डिसऑर्डर की समस्या से निपटने के लिए इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में ओबेसिटी एंड मेटाबोलिक सर्जरी सेंटर स्थापित किया है। उन्होंने भारतीय परिप्रेक्ष्य में मोटापे की परिभाषा की समीक्षा किए जाने की जरूरत पर जोर दिया है। इसी तरह, उन्होंने कहा कि बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) के अनुसार बैरियाट्रिक सर्जरी अब भी कॉस्मेटिक सर्जरी मानी जाती है और ऐसे में इसे स्वास्थ्य बीमा से बाहर रखा गया है। जब सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) और मध्य प्रदेश जैसी राज्य सरकार इसके लिए रिम्बर्समेंट मुहैया करा रही है, तो निजी बीमा कंपनियां इससे परहेज क्यों कर रहीं हैं।

कम होगी बीमा कंपनियों की लायबिलिटी

British surgeon wants insurance companies to include obesity surgery in claims
उन्होंने कहा कि बैरियाट्रिक सर्जरी को डायबिटीज के निदान के तौर पर स्वीकार किए जाने से पहले व्यापक अध्ययन की आवश्यकता है। निजी बीमा कंपनियों को यह बताया जाना चाहिए कि बैरियाट्रिक सर्जरी कराने वाले मरीजों को हो सकता है नी रिप्लेसमेंट और एंजियोप्लॉस्टी या बाईपास जैसे प्रोसीजर की जरूरत न पड़े। इससे भविष्य में बीमा कंपनियों के लिए लायबिलिटी कम होगी।

डॉ. महावर का कहना है कि बीमा कंपनियों को चुनिंदा सेंटरों के कुछ चुनिंदा सर्जन को मंजूरी देने पर विचार करना चाहिए, जो न सिर्फ ट्रेनिंग और ट्रैक रिकार्ड सामने रख सकें बल्कि स्वतंत्र आडिट के लिए अपना डेटा भी जमा कराने को तैयार हों। उन्होंने कहा कि इस बात के सबूत हैं कि भारतीयों में डायबिटीज और दूसरी मेटाबोलिक समस्याएं कम बीएमआई पर शुरू होती हैं।

कवर में होगी बैरियाट्रिक सर्जरी

British surgeon wants insurance companies to include obesity surgery in claims
ब्रिटेन में मेडिकल गाइडलाइंस तैयार करने वाली संस्था एनआईसीई डायबिटीज के मरीज के लिए मेटाबोलिक सर्जरी के लिए बीएमआई का मानक संशोधित कर 30 करने पर विचार कर रही है।

यहां तक कि हमारे एंडोक्राइनोलॉजिस्ट को इसे लागू करना चाहिए और 35 से अधिक बीएमआई वाले डायबिटीज के मोटे मरीजों को बैरियाट्रिक सर्जरी का सुझाव देना चाहिए। यह सुरक्षित, प्रभावी और मरीजों के हित में है।
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