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गरीबी घटाने के दावे पर भारी बीपीएल कार्ड का परिवार

Fri, 26 Jul 2013 09:44 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 26 Jul 2013 09:44 PM IST
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bpl family is larger than poverty line

केंद्र के गरीबी घटाने के दावे पर बीपीएल कार्डों की संख्या सवाल खड़े कर रही है।

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योजना आयोग देश में सिर्फ 27 करोड़ लोगों के गरीबी रेखा से नीचे रहने का दावा कर रहा है, जबकि देश भर में 8.6 करोड़ परिवारों को बीपीएल और 2.43 करोड़ को अंत्योदय कार्ड बांटे जा चुके हैं।

गरीबों के मामले में सरकार एक परिवार में औसतन 5.5 सदस्य मानकर चलती है, इस तरह से देश में करीब 55-60 करोड़ लोग बीपीएल और एपीएल कार्डों के आधार पर सस्ता राशन पा सकते हैं।
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देश में गरीबी की तय संख्या से ज्यादा बीपीएल कार्ड बांटने में दक्षिण भारत के राज्य सबसे आगे हैं। योजना आयोग के हालिया आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में 79 लाख लोग गरीबी की रेखा से नीचे हैं, लेकिन खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि राज्य में 2 करोड़ बीपीएल और 15 लाख अंत्योदय परिवारों को राशन कार्ड दिए जा चुके हैं।
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इसी तरह, तमिलनाडु में 82 लाख लोगों को गरीबी रेखा से नीचे बताया गया है जबकि वहां 1.76 करोड़ परिवारों के पास बीपीएल कार्ड हैं। इस मामले में उत्तर प्रदेश की स्थिति कमोबेश ठीक है। यूपी की बीपीएल आबादी करीब 6 करोड़ बताई गई है जबकि वहां 65 लाख बीपीएल और 40 लाख अंत्योदय परिवारों को राशन कार्ड मिले हैं।

हरियाणा में गरीबों की संख्या 28 लाख बताई गई है जबकि वहां 7 लाख बीपीएल और करीब 3 लाख अंत्योदय परिवारों को राशन कार्ड मिले हैं। पंजाब में 23 लाख लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं, लेकिन 3 लाख से भी कम राशन कार्ड बांटे गए हैं।

खाद्य मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कई राज्य योजना आयोग की ओर से तय बीपीएल आबादी से ज्यादा लोगों को पीडीएस का फायदा दे रहे हैं, इसलिए ज्यादा राशन कार्ड बंटे हैं। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वर्ष 1993-94 की बीपीएल आबादी के आधार पर राशन कार्ड दिए गए हैं। इसकी वजह से भी संख्या बढ़ी है। मंत्रालय फर्जी राशन कार्डों पर अंकुश लगाने का अभियान भी चला रहा है।


गरीबी रेखा नहीं, भुखमरी रेखा: हर्ष मंदर
राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य रहे हर्ष मंदर का कहना है कि 27 रुपये और 33 रुपये रोजाना खर्च को गरीबी रेखा मानना बड़ी भूल है। यह गरीबी रेखा नहीं बल्कि भुखमरी रेखा है। इसमें स्वास्थ्य पर दैनिक खर्च सिर्फ 1 रुपये माना गया है। गरीबी रेखा इतनी नीचे रखने से बहुत से लोग गरीब की श्रेणी में आने से वंचित रह जाएंगे। इसलिए कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सबको मिलने की वकालत की जा रही है।

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