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'बैंकिंग इंडस्ट्री से 3 फीसदी तेज बढ़ेगा बैंक ऑफ बड़ौदा'

Tue, 23 Apr 2013 12:14 AM IST
Updated Tue, 23 Apr 2013 12:14 AM IST
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bob cmd ss mundra interview

बैंक ऑफ बड़ौदा के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एसएस मूंदड़ा का कहना है कि देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक को वह नवनिर्माण और स्पर्श प्रोजेक्ट के जरिये दस लाख करोड़ रुपये के कारोबार तक चालू साल में ले जाना चाहते हैं।

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नवनिर्माण के तहत बैंक ग्राहकों को अधिक और बेहतर सेवा देगा तो वहीं स्पर्श के जरिये नई पीढ़ी के कर्मचारियों को बैंक की संस्कृति के रूप में ढाला जा रहा है।
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उनका मानना है कि अर्थव्यवस्था की स्थिति सुधर रही है और ब्याज दरों में तीन चौथाई फीसदी तक की कमी आ सकती है।

बैंक ऑफ बड़ौदा और अर्थव्यवस्था से जुड़े तमाम मुद्दों पर एसएस मूंदड़ा ने अमर उजाला के सीनियर एडिटर हरवीर सिंह के साथ लंबी बातचीत की। पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश:
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प्र- बैंक ऑफ बड़ौदा देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक है। अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात में स्थिति को सुधारने में बैंकों और खासतौर से आपके बैंक की क्या भूमिका है?
एसबीआई के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा दूसरा सबसे बड़ा बैंक है। जहां तक अर्थव्यवस्था को सुधारने की बात है, तो बैंक पहले से ही इस भूमिका को निभा रहे हैं। साल 2008-09 और 2009-10 में वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान जब अर्थव्यवस्था में सबसे बड़े चैलेंज थे अगर आप उस दौर का विश्लेषण करेंगे तो पाएंगे कि उस दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ 20-25 फीसदी रही थी।

वहीं निजी बैंकों की 8-10 फीसदी और विदेशी बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ नकारात्मक रही थी। ऐसे में साफ है आर्थिक संकट को उबारने के लिए सार्वजनिक बैंकों की प्रमुख भूमिका रहती है। सार्वजनिक बैंक सुस्ती के दौर में भी कर्ज देते रहे हैं। इसका कुछ छोटा मोटा परिणाम अगर एनपीए के रूप में दिख रहा है, तो यह कोई बहुत चिंता की बात नहीं है। इसे हल कर लिया जाएगा।

प्र- परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार होने का क्या ऊंची ब्याज दरों से संबंध है या नीतियों और मंजूरी प्रक्रिया जैसे मुद्दे अहम हैं?
परियोजनाओं में सुस्ती की प्रमुख वजह ब्याज दरों का ऊंचा होना नहीं है। यह बहुत छोटा फैक्टर है। प्रमुख वजह प्रोजेक्ट की क्लीयरेंस में अड़चन आना और उनको लागू करने में देरी होना है। ईंधन की उपलब्धता एक प्रमुख समस्या है। वित्त मंत्री इस समस्या को दूर करने के लिए काफी सक्रियता दिखा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने प्रोजेक्ट स्तर पर समीक्षा के लिए बैंकों और कॉरपोरेट के लोगों के साथ बैठक की थी। अंतरमंत्रालयी ग्रुप में इनके समाधान पर काम होगा। ऐसे में यदि इन समस्याओं को दूर किया जाता है, तो बैंक ऑफ बड़ौदा अपनी भूमिका को बखूबी निभाएगा।

प्र- अर्थव्यवस्था में सुस्ती का असर सबसे ज्यादा किस सेक्टर पर है?
सबसे ज्यादा असर पावर सेक्टर पर पड़ रहा है। पहले सबसे ज्यादा पावर और सड़क सेक्टर में ग्रोथ हो रही थी। पर इनकी ग्रोथ पर लगाम लगी है। इसकी प्रमुख वजह फॉरेस्ट क्लीयरेंस, पर्यावरण क्लीयरेंस, ईंधन की समस्या आदि हैं।

प्र- रियल सेक्टर और हाउसिंग क्षेत्र की क्या स्थिति है? क्या रियल एस्टेट में कीमतें क्या बहुत ज्यादा है?
देखिए जब पूरी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर हुआ है, तो ऐसे में रियल एस्टेट सेक्टर पर भी उसका असर पड़ा है। फिर भी दूसरे सेक्टर की तुलना में यहां बेहतर स्थिति है। इस क्षेत्र में कीमतों को क्षेत्रीय आधार पर देखना जरूरी है। मकान की मांग कीमतों को ज्यादा प्रभावित करती है। ब्याज ग्राहक के फैसले में कम भूमिका अदा करता है।

प्र- किन सेक्टर में बैंक ऑफ बड़ौदा का एनपीए ज्यादा है?
बैंक ऑफ बड़ौदा किसी एक क्षेत्र को ज्यादा केंद्र में नहीं रखता है। हमारा कारोबार सभी क्षेत्रों में बंटा हुआ है। विविधता पूर्ण पोर्टफोलियो होने की वजह से ज्यादा जोखिम नहीं है। पर एक बात और अहम है कि सभी सेक्टर में बेहतर कारोबार वाली कंपनियां हैं और खराब प्रदर्शन करने वाली कंपनियां हैं। इसी तरह खराब प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र में भी अच्छी कंपनियां होती हैं।

प्र- किन सेक्टर में बैंक ने ज्यादा रिस्ट्रक्चरिंग की है?
आयरन एंड स्टील, टेक्सटाइल, डिसकॉम, पॉवर और रियल एस्टेट सेक्टर में हुई है। पर, इसमें से एक चौथाई इकाइयों की तकनीकी वजह से रिस्ट्रक्चरिंग हुई है।

प्र- एसएमई और कृषि ऋण की क्या स्थिति है?
सभी सेक्टर की तरह एसएमई सेक्टर पर भी असर पड़ा है। कृषि लोन में सभी सेक्टर की तरह ही स्थिति है, अलग से कोई चिंता की बात नहीं है।

प्र- पिछले वित्त वर्ष (2012-13) की तीसरी तिमाही में बैंक ऑफ बड़ौदा के लाभ में बहुत ज्यादा गिरावट की वजह क्या है?
बैंक के प्रदर्शन को आंकने का सबसे सही तरीका उसके परिचालन लाभ को देखकर किया जा सकता है। केवल शुद्ध लाभ के जरिए आकलन करना सही नहीं है। जहां तक लाभ में गिरावट की बात है, तो उसकी प्रमुख वजह एनपीए का होना है। किसी खास तिमाही में रिस्ट्रक्चरिंग ज्यादा होने और अर्र्थव्यवस्था में सुस्ती इसकी वजह है।

ऐसे में प्रोविजनिंग ज्यादा करनी पड़ी है। जिसकी वजह से लाभ में गिरावट आई है। फिर भी हमारा एनपीए इंडस्ट्री में बेहतर स्थिति में है। सकल एनपीए 2.41 फीसदी और शुद्ध एनपीए 1.12 फीसदी है। इसके साथ ही मैं यह भी कहना चाहूंगा कि मैंने जब बैंक में सीएमडी का कार्यभार संभाला था, तो उसके कुछ दिन बाद ही बैंक के तीसरी तिमाही के परिणाम आए थे। ऐसे में उसमें मेरी भूमिका ज्यादा नहीं थी।

पर अब दो-ढाई महीने बाद मुझे ऐसा लगता है कि चौथी तिमाही में तीसरे तिमाही का असर रहेगा लेकिन नए साल (2013-14) की पहली तिमाही और उसके आगे उसके बाद स्थिति लगातार बेहतर होगी।

प्र- रिटेल और कॉरपोरेट बैंकिंग की कारोबार में क्या हिस्सेदारी है?
अभी होल सेल बैंकिंग की हिस्सेदारी थोड़ी ज्यादा है। हमारी कोशिश है कि होल सेल, रिटेल, एसएमई और कृषि के बीच संतुलन और बेहतर किया जाए। जिसके लिए बैंक रिटेल, एसएमई और कृषि पोर्टफोलियो को ज्यादा गति देंगे और साल के अंत में पोर्टफोलियो ज्यादा बैलेंस हो जाएगा।

प्र- रिटेल बैंकिंग के लिए किस तरह की नई रणनीति है?
बैंक ने रिटेल बैंकिंग में अपनी क्षमता काफी बढ़ाई है। ऐसे में हमें नए से ज्यादा मौजूदा क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने पर जोर देना है। रिटेल लोन फैक्ट्री, एसएमई लोन फैक्ट्री के कांसेप्ट बैंक ऑफ बड़ौदा ने दिया। इन दोनों की संख्या 50 से ज्यादा है। बैंक की 1,300 शाखाओं को नए मॉडल में बदला गया है, जिसे नवनिर्माण का नाम दिया गया है। इस तरह हमारी कोशिश इन संसाधनों के जरिए अपने कारोबार को कहीं आगे ले जाने की रहेगी।

प्र- कारोबार में बढ़ोतरी के क्या लक्ष्य हैं?
इंडस्ट्री की तुलना में हमारी ग्रोथ हमेशा इंडस्ट्री से 2-3 फीसदी ज्यादा रहती है। पर अभी जो स्थिति है उसे देखते हुए 17-18 फीसदी के सामान्य ग्रोथ का लक्ष्य रखा गया है। इस साल हमारा कारोबार आठ लाख आठ हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ऐसे में हम मार्च 2014 तक दस लाख करोड़ रुपये तक बिजनेस हासिल कर लेंगे। पर यह एक बहुत बड़ी चुनौती है। लेकिन हम इसके लिए एसेट क्वालिटी से कोई समझौता नहीं करेंगे।

प्र-बैंक नए साल में ग्राहकों के लिए क्या कर रहा है?
इस साल हमने अल्टरनेट चैनल पर ज्यादा जोर देने का लक्ष्य रखा है। एटीएम नेटवर्क 6,000 तक करने का लक्ष्य है। पीओएस मशीन की संख्या 25,000 तक हम करेंगे। मोबाइल बैंकिंग, नेट बैंकिंग के इस्तेमाल पर ज्यादा जोर, इसी तरह सभी एक्टिव सेविंग अकाउंट धारकों के पास डेबिट कार्ड जरूर हो और उनका उपयोग हो। पूरे देश में पूरे सप्ताह 24 घंटे बैंकिंग सुविधा देने के लिए 50 लॉबी इस साल बनाएंगे। जहां पासबुक प्रिंटिंग सुविधा, कैश और चेक जमा करने, मोबाइल बैंकिंग और नेट बैंकिंग सहित सभी सामान्य सुविधाएं ग्राहकों को मिल जाए। इसे चालूू साल में करने का रोडमैप अपने लोगों को दिया है।

प्र-ब्रांच नेटवर्क पर क्या कर रहे हैं?
अभी बैंक की 4,300 शाखाएं देश में हैं, जबकि 100 विदेश में हैं। नए साल में हम देश में 5,000 शाखाएं कर लेंगे। जहां तक अंतरराष्ट्रीय कारोबार की बात है तो 30 फीसदी इसकी हिस्सेदारी है। जिसे हम बरकरार रखेंगे। दुनिया के 24 देशों में हमारी मौजूदगी है। यूएई, यूएस, सिंगापुर, हांगकांग, बेल्जियम से हमें ज्यादा कारोबार मिलता है।

प्र- बैंक ऑफ बड़ौदा की पहुंच क्षेत्रीय आधार पर कहां ज्यादा है?
पश्चिमी भारत के गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान के अलावा उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश में काफी अच्छी पहुंच है। यहां हमारी एक हजार शाखाएं हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा दो राज्यों में हैं लीड बैंक है। हम उत्तर प्रदेश और राजस्थान में लीड बैंक हैं।

प्र- आने वाले वर्षों में बैंक में बड़े पैमाने पर सेवानिवृत्ति हो रही है। इस चुनौती को आप कैसे देखते है?
सार्वजनिक बैंकों में बड़े पैमाने पर सेवानिवृत्ति हो रही है। अभी 65 फीसदी पुराने और 35 फीसदी नए कर्मचारी हैं, जो अगले दो तीन साल में उलट जाएगा। ऐसे में नए कर्मचारियों को किस तरह बैंक की संस्कृति के लिए अनुकूल बनाया जाए, यह एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए हम स्पर्श नाम से एक योजना भी चला रहे हैं। मैं इसे इस तरह से कह सकता हूं कि बिजनेस के लिए हम नवनिर्माण नाम से योजना चला रहे हैं और मानव संसाधन के लिए स्पर्श। एक तरह से स्पर्श के साथ नवनिर्माण हमारा लक्ष्य है।

प्र- चालू साल में आप ब्याज दरों में क्या रुख देखते हैं?
मेरा मानना है कि इस साल रेपो रेट में 0.50-0.75 फीसदी तक कमी होगी। महंगाई कम होने लगी है, अर्थव्यवस्था में सुधार होगा तो बैंक कर्ज जरूर सस्ता करेेंगे। इसी को देखते हुए हाल ही में बैंकों ने जमा दरों में कमी की है। अगर लागत में कमी होगी, तो कर्ज सस्ता करना बैंकों के लिए आसान होगा।


प्र- बैंक ऑफ बड़ौदा के चेयरमैन के रूप में आप अपने कार्यकाल को किस तरह से देखना चाहेंगे?
बैंक के प्रमुख के रूप में कार्यभार ग्रहण करना, मेरे लिए घर लौटने जैसा है। बैंक कई स्तर पर बेहतर काम कर रहा है। कोशिश है कि जो बेहतर क्षेत्र हैं उनको उसी तरह बढ़ने देना, साथ ही बैंक को सामयिक भी रखना है। पोर्टफोलियो को ज्यादा बैलेंस रखना है। अल्टरनेट चैनल  को मजबूत करने पर सबसे ज्यादा जोर दे रहे हैं। कर्मचारियों के साथ ज्यादा से ज्यादा जुड़ाव हो और बैंक की ग्रोथ समावेशी हो। हमारा कारोबार सभी शाखाओं से बेहतर रूप से बढ़े यह प्रमुख रणनीति है।

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