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दस साल में सभी बोगियों में होंगे बायो टॉयलेट

Tue, 26 Feb 2013 09:14 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 26 Feb 2013 09:14 PM IST
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bio-toilets will be in all train coaches in ten years

खुले में सर्वाधिक गंदगी (रेलवे ट्रैक) फैलाने वाला रेलवे अब सुरक्षा के साथ स्वच्छता पर भी प्रमुखता के कार्य करेगा। लोकसभा में मंगलवार को रेल बजट पेश करते हुए रेलमंत्री पवन बंसल ने कहा कि न सिर्फ रेलवे स्टेशन और प्लेटफार्मों बल्कि यात्री कोचों कों बॉयो टॉयलेट युक्त करने की योजना पर तेजी से काम किया जाएगा।

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रेलवे कोचों में बायो टॉयलेट लगाने की योजना में ग्रामीण विकास मंत्रालय अहम रोल निभा रहा है। इसके तहत इस योजना पर होने वाले कुल खर्च में पचास फीसदी योगदान ग्रामीण विकास मंत्रालय कर रहा है। उम्मीद है कि वर्ष 2022 तक रेलवे के सभी कोच बायो टॉयलेट युक्त हो जाएंगे।
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मंत्रालय ने रेलवे को स्वच्छ बनाने की जिम्मेदारी रक्षा अनुसंधान विकास संस्थान (डीआरडीओ) को सौंपी है। डीआरडीओ ने इसके लिए जैविक शौचालय (बायो टॉयलेट) का निर्माण कर रहा है। मौजूदा समय रेलवे के पास लगभग 53000 कोच हैं। जिसमें रोजाना लगभग दो करोड़ यात्री सफर करते हैं।
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चूंकि कोच में गंदगी को जमा करने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए यह गंदगी रेलवे पटरियों पर ही गिरती है। इससे न सिर्फ रेलवे ट्रैक गंदा होते हैं बल्कि खुले में गंदगी से पर्यावरण पर भी विपरीत असर पड़ता है। रेलवे को भी पूरी तरह से स्वच्छ बनाने का काम डीआरडीओ को सौंपा गया है।

डीआरडीओ ने बायो टॉयलेट का निर्माण शुरू कर दिया है। इसकी विशेषता है कि यह गंदगी को पूरी तरह से पानी में बदल देता है। एक कोच में बायो टॉयलेट लगाने का खर्च लगभग दस लाख रुपये आता है। अभी तक डीआरडीओ ने लगभग 500 कोचों को बायो टॉयलेट युक्त कर चुका है।


रेलवे के सभी पुराने कोचों को बायो टॉयलेट युक्त बनाने में आठ से दस वर्ष का समय लगेगा। जबकि नए कोच पूरी तरह से बायो टॉयलेट युक्त ही बनाए जाएंगे। रेलवे के सभी कोचों में बायो टॉयलेट लगाने की इस योजना पर लगभग 5000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। रेलवे को स्वच्छ बनाने की इस मुहिम पर होने वाले इस खर्च का पचास फीसदी भार ग्रामीण विकास मंत्रालय उठाएगा जबकि शेष रेलवे स्वयं खर्च करेगा।

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