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रेलवे से बिहार की आस भरी निगाहें

Mon, 25 Feb 2013 11:39 PM IST
पटना/अतुल बरतरिया
पटना/अतुल बरतरिया Updated Mon, 25 Feb 2013 11:39 PM IST
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bihar hopes to railway

रेलवे मंत्रालय पर बिहार का कब्जा रहा तो राज्य में रेल भी खूब दौड़ी। बिहारी रेल मंत्रियों ने अपने समय में राज्य में विकास योजनाओं का जमकर शिलान्यास भी किया। लेकिन बिहार के हाथ से मंत्रालय क्या गया, मानो राज्य में रेल विकास का पहिया थम सा गया। इस बार भी बिहार की निगाहें रेल बजट पर लगी हैं।

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पुरानी बात छोड़ दी जाए तो केंद्र में बनी गठबंधन की सरकारों में जार्ज फर्नांडीज, राम विलास पासवान, नीतीश कुमार व लालू प्रसाद यादव ने कुल मिलाकर 15 बार रेल बजट पेश किया। उस दौरान रेल बजट में बिहार को सौगातें मिलती रहीं। खूब पटरियां बिछीं और नए कारखाने स्थापित हुए। वक्त बदलने के साथ ही बिहार के हाथ से रेल मंत्रालय भी फिसल गया। इसके बाद तो बिहार में रेल की गति खासी मंथर हो गई।
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विकास योजनाओं के लिए पैसा मिलना या तो बंद हो गया या फिर इतना कम मिला कि काम आगे ही नहीं बढ़ सका। आज भी तमाम योजनाएं लगभग बंदी की कगार पर है। लालू और पासवान के केंद्र को समर्थन की वजह से बिहार की जनता हर बजट के दौरान आशान्वित दिखती है. लेकिन मायूसी ही हाथ लगती है।
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केंद्र सरकार अगर पुरानी परियोजनाओं को ही चालू कर दे तो मेहरबानी होगी। वैसे वे चाहते हैं कि पटना से कलकत्ता, मुंबई के लिए कम से कम एक-एक नई ट्रेन जरूर शुरू की जाए।
- नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार

लंबित अहम योजनाओं पर एक नजर
:- बेला (छपरा) में रेल पहिया कारखाना
लालू प्रसाद यादव ने 2006 में मंजूरी दी, 2010 में काम पूरा होना था। निर्माण पूरा, पर उत्पादन अभी तक शुरू नहीं
:- मढौरा (छपरा) में रेल डीजल इंजन कारखाना
पीपीपी मोड में इसे 2006 में मंजूरी दी गई। अभी तक जमीन अधिग्रहण का काम भी पूरा नहीं, योजना लागत तीन सौ करोड़ बढ़कर 17सौ करोड़ हो चुकी है।
:- मधेपुरा इलेक्ट्रॉनिक कारखाने में काम शुरू तक नहीं हो सका
:- सोनपुर में डेमू शेड कारखाने की अभी तक चारदीवारी ही बन सकी
:- मुजफ्फरपुर-सुगौली के बीच 104 किमी लंबी रेल लाइन के 2002 में अटल बिहारी बाजपेई ने मंजूर किया, अभी तक महज 14 किमी ही बन सकी
:- पटना और दानापुर को विश्वस्तरीय स्टेशन बनाने की घोषणा पर अमल नहीं
:- राज्य में लगभग 2500 किमी रेल पटरी बिछाने का काम तक शुरू नहीं

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