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रेल बजट: खाली रही बिहार की झोली
पटना/ब्यूरो
Updated Tue, 26 Feb 2013 07:14 PM IST
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रेल मंत्रालय पर बिहार का कब्जा रहा तो राज्य में रेलगाड़ी खूब दौड़ी, लेकिन बिहार के हाथ से मंत्रालय क्या गया मानो राज्य में रेल का विकास थम सा गया। यह सिलसिला इस बार भी जारी रहा। पुरानी योजनाओं के लिए कोई पैसा नहीं दिया गया। अलबत्ता कुछ साप्ताहिक ट्रेनें शुरू कर मरहम लगाने की कोशिश जरूर की गई है।
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पुरानी बात छोड़ दी जाए तो केंद्र में बनी गठबंधन की सरकारों में जार्ज फर्नांडीज, रामविलास पासवान, नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव ने कुल मिलाकर 15 बार बजट पेश किया। उस दौरान रेल बजट में बिहार को सौगातें मिलती रहीं लेकिन वक्त बदलने के साथ ही बिहार के हाथ से रेल मंत्रालय भी फिसल गया। इसके बाद तो बिहार में रेल की गति मंद पड़ गई।
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विकास योजनाओं के लिए पैसा मिलना या तो बंद हो गया या फिर इतना कम मिला कि काम आगे ही नहीं बढ़ सका। आज भी तमाम योजनाएं लगभग बंदी की कगार पर हैं। माना जा रहा था कि दो पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान केंद्र सरकार को समर्थन दे रहे हैं। ऐसे में उनके कार्यकाल में स्वीकृत परियोजनाओं को कांग्रेसी बजट में आगे बढ़ने की उम्मीद थी पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।
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'हिम्मत थी तो किराया बढ़ाते। अगर खर्च बढ़ रहा है तो जनता को यह समझाना चाहिए था। बजट से पहले किराया बढ़ा दिया और अब अन्य तरीकों से जनता पर बोझ डाल दिया। उनके समय में लागू एन्टी कोलिजन डिवाइस पर पहले काम रोका गया। अब नए नाम से इसे लागू किया जा रहा है। इस बजट में पूरी तरह से क्षेत्रीय असंतुलन है और बिहार की उपेक्षा की गई है।'
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
बिहार को मिली नई ट्रेनें
एक्सप्रेस
पाटिलपुत्र - बैंगलूरू (साप्ताहिक)
पटना - तिनसुकिया (साप्ताहिक)
कटिहार - हाबड़ा (साप्ताहिक)
कटिहार - बरौनी (साप्ताहिक)
पटना - सासाराम (साप्ताहिक)
माल्दा - हाबड़ा
पैसेंजर ट्रेन
छपरा - थावे
सीतामढ़ी - रक्सौल
मुजफ्फरपुर - सीतामढ़ी
समस्तीपुर - सीतामढ़ी
विरोध में संघमित्रा एक्सप्रेस को रोका
बजट में बिहार की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए रेलवे कर्मियों ने संघमित्रा एक्सप्रेस को आधे घंटे तक रोके रखा। ऑल इंडिया रेलवे ठेकेदार कामगार संघ ने सीटू के तत्वाधान में रेल बजट में बिहार की उपेक्षा पर आक्रोश जताया। इसके विरोध में संघ ने पटना स्टेशन पहुंची संघमित्रा एक्सप्रेस को रोक लिया। लोग ट्रेन के आगे लेट गए और विरोध प्रदर्शन किया। बाद में यात्रियों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए ट्रेन को आधे घंटे बाद जाने दिया गया।