फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   big wishes restrictions in union budget

ऊंची ख्वाहिशों पर बजट की बंदिशें

Thu, 28 Feb 2013 11:47 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 28 Feb 2013 11:47 PM IST
विज्ञापन
big wishes restrictions in union budget

यह सुनने में अच्छा लग सकता है कि वित्त मंत्री ने सोलह लाख करोड़ के कुल बजट में से शिक्षा मंत्रालय को एक लाख करोड़ से भी ज्यादा पैसा दिया लेकिन देश की शैक्षणिक जरूरतों को देखते हुए 12वीं पंचवर्षीय योजना में शिक्षा योजनाओं के लिए यह बहुत कम है।

विज्ञापन


शिक्षा के लिए आवंटित कुल राशि में से 65867 करोड़ रुपये विकासात्मक कार्यों के लिए हैं। इसमें सबसे ज्यादा धनराशि स्कूली शिक्षा विशेष रूप से आरटीई के तहत स्कूलों के विस्तार, शिक्षकों की भर्ती एवं वेतन तथा मिड डे मील पर खर्च की जाएगी।
विज्ञापन


उच्च शिक्षा के लिए कुल 16198 करोड़ दिए गए। इस धनराशि से देश के पांच सौ से अधिक विश्वविद्यालय तथा हजारों की संख्या में महाविद्यालयों के विकास की बात सोचना भी बेमानी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


केंद्र की सबसे चर्चित आरटीई योजना के लिए चालू वर्ष में कुल 25 हजार करोड़ मिले थे किंतु बाद में दो हजार करोड़ रुपये की कटौती कर दी गई। इस साल आरटीई मद में 27000 करोड़ का प्रस्ताव है। अप्रैल 2013 से देश में आरटीई कानून लागू हो जाएगा। देश के तमाम राज्यों में अभी तक स्कूली ढांचा भी पूरी तरह खड़ा नहीं हो सका है।

बजट का यही हाल रहा तो आरटीई का लक्ष्य पूरा करने में अभी पांच साल और लगेंगे। माध्यमिक शिक्षा अभियान के लिए इस बार बजट में कुछ वृद्धि की गई है लेकिन बढ़ती जरूरतों के लिए और अधिक बजट एवं प्रयासों की आवश्यकता होगी।

उच्च शिक्षा के लिए कुल 16210 करोड़ इसमें से सात हजार करोड़ विश्वविद्यालयों को अनुदान के मद में, छात्रों को वित्तीय मदद के रूप में 1200 करोड़ तथा तकनीकी शिक्षा के लिए 7229 करोड़ रुपये का प्रावधान है। बजट में सूचना, संचार एवं तकनीकी के जरिए शिक्षा को बढ़ावा देने लिए 400 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। यदि शिक्षा के विकास के पांच साल के आंकड़े को देखें तो यह धनराशि बहुत कम है।


पांच साल में आईसीटी में 5000 करोड़ निवेश का लक्ष्य है। इस लिहाज से आवंटन पचास फीसदी भी नहीं किया गया है। तय योजनाओं को समय से पूरा करने के लिए उच्च शिक्षा को इस साल 25000 करोड़ रुपये की जरूरत थी लेकिन यह राशि बजट की मजबूरी के चलते न तो पिछले साल मिल पाया था और न ही इस साल मिल सका।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed