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टैक्सटाइल इंडस्ट्री: बड़ी मछली ही खा रही हैं पूरा दाना
नोएडा/ब्यूरो
Updated Fri, 22 Feb 2013 10:50 PM IST
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आठ लाख लोगों का परिवार पालने वाले कपड़ा उद्योग यानी टेक्सटाइल इंडस्ट्री में बड़े खिलाड़ी ही मलाई मार रहे हैं। बाकी छोटे और लघु उद्यमियों को खास राहत नहीं मिली है। इसकी वजह से कई बार छोटे उद्यमियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पिछले चार साल में नोएडा ‘सिटी आफ अपैरल’ हो चुका है।
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वहीं, सरकारी नीतियों के कारण बांग्लादेश भारत को पीछे छोड़ने में लगा है। जहां सात साल पहले टेक्सटाइल इंडस्ट्री भारत में पांच बिलियन डालर की थी और बांग्लादेश में तीन बिलियन के पास थी। लेकिन 2012 में बांग्लादेश का आंकड़ा 566.67 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 20 बिलियन डालर पहुंच चुका है, जबकि भारत में सिर्फ 170 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज हुई है।
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औद्योगिक नगरी के बसने के साथ ही शहर में टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने भी कदम रखा। 1980 में कुछ उद्यमियों ने अपनी फैक्ट्रियां लगाई, लेकिन इसके बाद रफ्तार में कमी आ गई। 1984 दंगे के बाद स्थिति ज्यादा खराब हुई और नए उद्यमी आने से डरने लगे। जैसे तैसे कपड़ा उद्योग आगे बढ़ा।
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इसके बाद नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट कल्सटर एसोसिएशन का गठन किया गया, जिसमें उद्यमियों ने सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी पीएन सिंह को जोड़ा और लुधियाना के कपड़ा व्यापारियों को नोएडा लाने की कोशिश शुरू की गई। इसमें सफलता भी मिली, 2005 में एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित ठकुराल ने प्रयास शुरू किया और अगले चार सालों में 1500 यूनिट खड़ी कर दी।
आज नोएडा को सिटी आफ अपैरल के नाम से जाना जाता है। यहां की इकाइयों में तीन लाख से अधिक श्रमिक काम करते हैं, जबकि करीब पांच लाख लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। दूसरे उद्योगों की तरह टेक्सटाइल इंडस्ट्री भी आगामी बजट की ओर निगाहें लगाकर बैठी हैं।
ललित ठकुराल ने इंडस्ट्री की ओर से वित्त मंत्री को पत्र लिखकर मांग उठाई हैं, जिसमें लघु इकाइयों को मिलने वाले लोन की शर्तों को आसान करने की बात कही गई। वहीं, लेबर लॉ में संशोधन का मुद्दा भी उठाया है। वहीं इंडस्ट्री का मनाना है कि बड़े खिलाड़ी अक्सर सरकारी मलाई खा जाते हैं यानी सरकारी योजनाओं का लाभ ले लेते हैं, लेकिन छोटे उद्यमियों के लिए व्यवस्था नहीं होने से उनके हाथ खाली ही रहते हैं।
टेक्सटाइल इंडस्ट्री की वित्त मंत्री से मुख्य मांगें
:- लाइसेंस स्कीम में कमी होने से आ रही है कई दिक्कत
:- कस्टम ड्यूटी को कम करके दी जा सकती है सीधी राहत
:- मशीनों को अपग्रेड करने के लिए बनाई जाएं विशेष नीति
:- लघु उद्योगों के संबंध में विशेष नीति निर्धारण करने की आवश्यकता
:- सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने से उद्योगों को बढ़ाने में मदद मिलेगी
:- बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए बड़े स्तर पर की जाएं कार्रवाई
:- लघु उद्योगों के लिए बैंक लोन प्रोसेसिंग फीस को समाप्त किया जाए
:- कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए इंडस्ट्री फोर्स का किया जाए गठन
:- पांच करोड़ का टर्न ओवर करने वालों के लिए बनाई जाए नई नीति
क्या कहते हैं उद्यमी
सिंगल विंडो सिस्टम लागू हो
'कपड़ा उद्योग के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाए। इससे दो बड़े फायदे होंगे। पहला कार्यों को पूरा करने में समय कम लगेगा, जबकि दूसरा नए उद्यमियों को आसानी से इंडस्ट्री में आने का मौका मिल सकेगा।'
- ललित ठकुराल, निदेशक, महाराणा ऑफ इंडिया
बिजली ने कमर तोड़ी
'दूसरे राज्यों में कई छूट के साथ बिजली व्यवस्था भी काफी दुरुस्त है। नोएडा में टैक्स ज्यादा होने के बाद भी बिजली आपूर्ति दिक्कत देती है। ऐसे में एफएम को बिजली के सेक्टर में कार्रवाई करनी चाहिए।'
- विनीत कत्याल, निदेशक, डिजनेयर फैशन
लेबर लॉ में सुधार हो
'नोएडा में छोटी बड़ी हजारों कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें लाखों लेबर काम करती हैं। ऐसे में लेबर लॉ में कुछ कमियां हैं। इन्हें दूर करने के लिए संशोधन की आवश्यकता है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।'
- डीके झा, निदेशक, एएसफैशन
इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया जाए
'इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाए। एफएम को इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर देना होगा। कई बार अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं मिलता, जिससे समस्याएं बढ़ती है। इसमें कानून व्यवस्था और ट्रांसपोर्ट सिस्टम मुख्य हैं।'
- राजीव शर्मा, निदेशक, थिमो क्लॉथिंग