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२०१५ में आएंगे भारतीय विमानन उद्योग के अच्छे दिन
New Delhi
Updated Wed, 31 Dec 2014 06:10 PM IST
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२०१५ में आएंगे भारतीय विमानन उद्योग के अच्छे दिन
घाटे से उबर कर ८१० करोड़ रुपये का कमाएंगी मुनाफा
नई दिल्ली। विमानन उद्योग की थोड़ी भी जानकारी रखने वाले पाठक भी जानते होंगे कि एयर इंडिया, जेट एयरवेज और स्पाइसजेट जैसी भारतीय विमानन कंपनियां इस समय किस कदर घाटा उठा रही हैं। लेकिन इनके भी अच्छे दिन आने वाले हैं। रिसर्च फर्म क्रिसिल द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट का कहना है कि वर्ष २०१५ में इन कंपनियों का कायाकल्प होगा और २०१६ तक इन कंपनियों का मुनाफा ८१० करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। इस समय तो २०१४ में इन कंपनियों को करीब १५० करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।
क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक अगले कुछ महीनों के दौरान भारतीय विमानन उद्योग के लिए अच्छे दिन साबित होने वाले हैं। इसकी झलक तो २०१४ के अंतिम कुछ महीनों में ही दिखनी शुरू हो चुकी है। इस समय मांग में वृद्धि हो रही है, विमानों का पैसेंजर लोड फैक्टर (पीएलएफ) बढ़ रहा है। इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में रिकार्ड कमी हुई है, इसलिए भारत समेत दुनिया भर में एटीएफ की कीमतें नरम हुई है। इनके लिए चिंता की वजह डालर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना है लेकिन यदि इसकी दरें भी स्थिर रहती हैं तो इनके लिए बेहतर होगा। इन सबके प्रभाव से भारतीय विमानन कंपनियों के परिचालन लाभ (ऑपरेटिंग प्रोफिट) में २०१६ तक करीब ११ फीसदी की वृद्धि होगी।
क्रिसिल रिसर्च के सीनियर डाइरेक्टर (इंडस्ट्री एंड कस्टमाइज्ड रिसर्च) प्रसाद कोपरकर का कहना है कि दीर्घ काल में भारतीय विमानन कंपनियों को एक बेहतरीन कारोबारी माहौल मिलेगा। कच्चे तेल की गिरती कीमतें क्षेत्र के लिए वरदान साबित हुई हैं। उनका मानना है कि वर्ष २०१४ के मुकाबले वर्ष २०१६ में एटीएफ की कीमतें करीब २५ फीसदी तक सस्ती होंगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक तरफ एटीएफ सस्ती होगी तो दूसरी तरफ हवाई सेवा की मांग बढ़ेगी। इस समय वर्ष २०१० का काल नहीं दोहराएगा जबकि एटीएफ सस्ता होने का लाभ विमानन कंपनयिां नहीं ले पाई थीं क्योंकि उस समय अर्थव्यवस्था की सुस्ती की वजह से बाजार में मांग ही नहीं थी।
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उनका कहना है कि इस समय जो बाजार की स्थितियां हैं और विमानों का पीएलएफ बढ़ रहा है, उससे लगता है कि विमानन कंपनियों का मार्जिन बढ़ेगा। रिपोर्ट का अनुमान है कि पीएलएफ में ३०० से ४०० प्वाइंट की बढ़ोतरी होगी। हालंाकि सस्ते एटीएफ का लाभ ग्राहकों को भी मिलेगा लेकिन उसका प्रतिशत कम होगा। ग्राहकों की संख्या बढऩे की वजह से कंपनियों की औसत आमदनी में २-४ फीसदी का इजाफा होगा। हालांकि इसी दौरान भारतीय आकाश में कई नई कंपनियों का भी आगमन होने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी लेकिन इससे विमानन उद्योग का फायदा ही होगा क्योंकि भारत में सेवा का स्तर सुधरेगा। रिपोर्ट का मानना है कि इस समय जो कंपनियां विमान उड़ा रही हैं, वे इन वर्षों के दौरान शायद ही अपनी क्षमता में विस्तार करे क्योंकि इनकी आर्थिक हालत इसकी अनुमति नहीं देती है।
क्रिसिल के इंडस्ट्री रिसर्च डाइरेक्टर राहुल प्रिथियानी का कहना है कि आने वाले दिनों में भारतीय विमानन कंपनियों का घाटा धीरे धीरे कम होगा और यह एक दिन मुनाफा में बदल जाएगा। इस समय कंपनियों की १५ फीसदी आमदनी पुराने ऋणों के ब्याज के भुगतान में चली जाती है। इन कंपननियों में जब फिर से पंूजी डाली जाएगी तो स्थिति में बदलाव होगा और ये कंपनियां फिर से शुद्ध मुनाफा अर्जित करने लगेंगी। रिपोर्ट के मुताबिक तीन विमानन कंपनियों में करीब ३५० करोड़ रुपये का निवेश होगा।
--शिशिर चौरसिया--
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घाटे से उबर कर ८१० करोड़ रुपये का कमाएंगी मुनाफा
नई दिल्ली। विमानन उद्योग की थोड़ी भी जानकारी रखने वाले पाठक भी जानते होंगे कि एयर इंडिया, जेट एयरवेज और स्पाइसजेट जैसी भारतीय विमानन कंपनियां इस समय किस कदर घाटा उठा रही हैं। लेकिन इनके भी अच्छे दिन आने वाले हैं। रिसर्च फर्म क्रिसिल द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट का कहना है कि वर्ष २०१५ में इन कंपनियों का कायाकल्प होगा और २०१६ तक इन कंपनियों का मुनाफा ८१० करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। इस समय तो २०१४ में इन कंपनियों को करीब १५० करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।
क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक अगले कुछ महीनों के दौरान भारतीय विमानन उद्योग के लिए अच्छे दिन साबित होने वाले हैं। इसकी झलक तो २०१४ के अंतिम कुछ महीनों में ही दिखनी शुरू हो चुकी है। इस समय मांग में वृद्धि हो रही है, विमानों का पैसेंजर लोड फैक्टर (पीएलएफ) बढ़ रहा है। इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में रिकार्ड कमी हुई है, इसलिए भारत समेत दुनिया भर में एटीएफ की कीमतें नरम हुई है। इनके लिए चिंता की वजह डालर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना है लेकिन यदि इसकी दरें भी स्थिर रहती हैं तो इनके लिए बेहतर होगा। इन सबके प्रभाव से भारतीय विमानन कंपनियों के परिचालन लाभ (ऑपरेटिंग प्रोफिट) में २०१६ तक करीब ११ फीसदी की वृद्धि होगी।
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क्रिसिल रिसर्च के सीनियर डाइरेक्टर (इंडस्ट्री एंड कस्टमाइज्ड रिसर्च) प्रसाद कोपरकर का कहना है कि दीर्घ काल में भारतीय विमानन कंपनियों को एक बेहतरीन कारोबारी माहौल मिलेगा। कच्चे तेल की गिरती कीमतें क्षेत्र के लिए वरदान साबित हुई हैं। उनका मानना है कि वर्ष २०१४ के मुकाबले वर्ष २०१६ में एटीएफ की कीमतें करीब २५ फीसदी तक सस्ती होंगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक तरफ एटीएफ सस्ती होगी तो दूसरी तरफ हवाई सेवा की मांग बढ़ेगी। इस समय वर्ष २०१० का काल नहीं दोहराएगा जबकि एटीएफ सस्ता होने का लाभ विमानन कंपनयिां नहीं ले पाई थीं क्योंकि उस समय अर्थव्यवस्था की सुस्ती की वजह से बाजार में मांग ही नहीं थी।
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उनका कहना है कि इस समय जो बाजार की स्थितियां हैं और विमानों का पीएलएफ बढ़ रहा है, उससे लगता है कि विमानन कंपनियों का मार्जिन बढ़ेगा। रिपोर्ट का अनुमान है कि पीएलएफ में ३०० से ४०० प्वाइंट की बढ़ोतरी होगी। हालंाकि सस्ते एटीएफ का लाभ ग्राहकों को भी मिलेगा लेकिन उसका प्रतिशत कम होगा। ग्राहकों की संख्या बढऩे की वजह से कंपनियों की औसत आमदनी में २-४ फीसदी का इजाफा होगा। हालांकि इसी दौरान भारतीय आकाश में कई नई कंपनियों का भी आगमन होने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी लेकिन इससे विमानन उद्योग का फायदा ही होगा क्योंकि भारत में सेवा का स्तर सुधरेगा। रिपोर्ट का मानना है कि इस समय जो कंपनियां विमान उड़ा रही हैं, वे इन वर्षों के दौरान शायद ही अपनी क्षमता में विस्तार करे क्योंकि इनकी आर्थिक हालत इसकी अनुमति नहीं देती है।
क्रिसिल के इंडस्ट्री रिसर्च डाइरेक्टर राहुल प्रिथियानी का कहना है कि आने वाले दिनों में भारतीय विमानन कंपनियों का घाटा धीरे धीरे कम होगा और यह एक दिन मुनाफा में बदल जाएगा। इस समय कंपनियों की १५ फीसदी आमदनी पुराने ऋणों के ब्याज के भुगतान में चली जाती है। इन कंपननियों में जब फिर से पंूजी डाली जाएगी तो स्थिति में बदलाव होगा और ये कंपनियां फिर से शुद्ध मुनाफा अर्जित करने लगेंगी। रिपोर्ट के मुताबिक तीन विमानन कंपनियों में करीब ३५० करोड़ रुपये का निवेश होगा।
--शिशिर चौरसिया--