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सुविधाओं के दावों के बीच धरातल में पहुंचा ‘बार्टर ट्रेड’

Thu, 13 Dec 2012 10:42 PM IST
जम्मू/भूपेंदर सिंह भाटिया
जम्मू/भूपेंदर सिंह भाटिया Updated Thu, 13 Dec 2012 10:42 PM IST
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 barter trade decline

21 अक्टूबर 2008 का दिन जम्मू-कश्मीर स्थित लाइन आफ कंट्रोल के दोनों ओर रहने वाले कश्मीरियों के लिए एक नए अध्याय की शुरूआत हुई थी, जब भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के बीच ड्यूटी फ्री क्रास एलओसी ट्रेड की शुरूआत की थी।

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इसका मुख्य उद्देश्य एलओसी केदोनों ओर रहने वाले कश्मीरियों को करीब लाना था। लेकिन सुविधाओं के दावों के बीच यह ‘बार्टर ट्रेड’ (सामान के बदले सामान) धरातल पर पहुंचता जा रहा है। ऐसा नहीं है कि पिछले चार सालों में इस अनोखे ट्रेड (बिना किसी खास करेंसी पर आधारित) ने ऊंचाईयां हासिल नहीं की, लेकिन पिछले चंद माह से ‘ट्रेड आइटम लिस्ट’ के विवाद के कारण कारोबार घटता जा रहा है। इसका मुख्य कारण कुछ आइटमों पर प्रतिबंध लगना है। हालत यह है कि एलओसी पर कभी गुलजार रहने वाला ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर आज सूना नजर आता है।
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नियमों के अनुसार पुंछ से रावलकोट सौ ट्रक और उड़ी से मुजफ्फराबाद दो सौ ट्रक माल भेजने की अनुमति है। पिछले समय कारोबार ने ऐसी ऊंचाईयां हासिल की कि व्यापारियों ने दोनों ओर की सरकारों से ट्रकों की संख्या में इजाफा करने की मांग की, लेकिन आज हालत यह है कि पुंछ से सप्ताह में सौ के स्थान पर मात्र 8-10 ट्रक और उड़ी से दो सौ के स्थान पर 20-25 ट्रक ही माल जा रहा है।  ट्रेड के इतिहास में पिछले माह दो ऐसे मौके आए, जब पुंछ से एक भी ट्रक माल पीओके नहीं गया।
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ज्वाइंट चैंबर आफ एलओसी ट्रेड (पुंछ) के प्रवक्ता सिराज अहमद खान कहते हैं कि कारोबार गिरने का मुख्य कारण उन आइटमों पर प्रतिबंध लगाना है, जिसकी पीओके से सबसे ज्यादा डिमांड होती है। पिछले चार सालों में 70 फीसदी कारोबार नारियल का हुआ, लेकिन अब उस पर प्रतिबंध है। 12 अक्टूबर 2012 को केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे एलओसी पर पहुंचे थे। उनके सामने व्यापारियों ने प्रतिबंध का मामला उठाया था। उन्होंने खुद कहा था कि इस पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत नहीं, लेकिन अभी तक कस्टम विभाग से कोई आदेश प्राप्त नहीं होने से व्यापार ठप है।
 
वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मई 2008 में बतौर विदेश मंत्री इस्लामाबाद की यात्रा की थी, जहां क्रास एलओसी ट्रेड शुरू करने पर सहमति बनी थी। बाद में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी ने इस व्यापार को सप्ताह में दो दिन करने की हरी झंडी दी थी। पिछले दिनों पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी ने अपने भारत दौरे के दौरान सप्ताह में दो दिन चलने वाले इस ट्रेड को बढ़ाकर चार दिन करने पर सहमति दी।

व्यापार के तहत दोनों ओर से 21-21 आइटमों का कारोबार करने की अनुमति होगी, जिनका उत्पादन या पैदावार दोनों ओर के कश्मीर में होती है। कस्टम का कहना है कि नारियल जम्मू-कश्मीर में पैदा नहीं होता, जबकि व्यापारियों का तर्क है कि यह आइटम लिस्ट के ड्राई फ्रूट वर्ग में आता है और जबसे एलओसी ट्रेड शुरू हुआ है, इसका व्यापार होता आया है। इसके अलावा प्याज, अदरक, लहसुन, बादाम जैसे आइटमों पर भी समय-समय पर विवाद उठता रहा है।


घटते कारोबार को ध्यान में रखते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार को आइटम सूची संशोधित कर इसकी संख्या बढ़ाने के लिए पाकिस्तान से बातचीत करने की अपील की है, लेकिन अभी तक यह सूची विदेश मंत्रालय में अटकी पड़ी है।  दोनों ओर की सरकारें इस व्यापार को प्रोत्साहन देने के वादे तो कर रही हैं, लेकिन आज हालत यह है कि कारोबार मात्र 20 फीसदी रह गया है।

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