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पेंडिंग हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर बैंकों को मिल सकती है ढील

Mon, 04 Feb 2013 11:19 PM IST
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव Updated Mon, 04 Feb 2013 11:19 PM IST
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banks will concession on pending housing projects

अटके हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को दोबारा शुरू करने के लिए सरकार नियमों में बदलाव करने की कवायद कर रही है। जिससे कि ऐसे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को दोबारा शुरू किया जा सके, जो कि अपरिहार्य परिस्थितियों की वजह से पूरे नहीं हो पाए हैं। ऐसे प्रोजेक्ट्स को दोबारा शुरू करने के लिए वित्त मंत्रालय ने आरबीआई से बैंकों के कर्ज देने के नियमों में बदलाव करने का सुझाव दिया है।

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सरकार ऐसे प्रोजेक्ट्स के जरिए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की कीमतों में कमी लाने और नई मांग निकलने की उम्मीद कर रही है। इसके लिए नेशनल हाउसिंग बैंक के जरिए सभी बैंकों से देश भर में अटके प्रोजेक्ट्स की सूची भी मांगी गई है। वित्त मंत्रालय से संबंधित एक अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि अटके हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के संबंध में बैंकों के साथ बैठकें की गई हैं।
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जिसमें यह मांग आई है कि भारतीय रिजर्व बैंक गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) और कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग करने संबंधी नियमों में ढील दे। ताकि, बैंक ऐसे प्रोजेक्ट्स को दोबारा कर्ज दे सके। इसी के मद्देनजर वित्त मंत्रालय ने भी आरबीआई को सुझाव दिया है कि प्रोजेक्ट्स को दोबारा शुरू करने के लिए नियमों में बदलाव किया जाए।
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रिजर्व बैंक के मौजूदा कानून के मुताबिक बैंक यदि अपने किसी कर्ज के खाते को एनपीए से रोकने के लिए कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग करता है, तो उसे कर्ज की राशि का 2.75 फीसदी तक प्रोविजनिंग करना पड़ता है। जबकि, कर्ज खाते का एनपीए हो जाने पर बैंकों को कर्ज की राशि का 15 फीसदी प्रोविजनिंग करना पड़ता है।

सार्वजनिक बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सरकार अटके पड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करना चाहती है। ऐसे प्रोजेक्ट्स में बैंकों के कई कर्ज के खाते एनपीए घोषित हो गए हैं। ऐसे में यदि मौजूदा नियमों के तहत इन प्रोजेक्ट्स को कर्ज देंगे, तो बैंकों को कोई प्रोत्साहन नहीं मिलेगा।


बैंकों की तरफ से यह मांग रखी गई है कि जो प्रोजेक्ट दोबारा शुरू हो सकते हैं, उनके कर्ज को एनपीए न माना जाए, जिससे बैंकों को प्रोविजनिंग करने से राहत मिलेगी।

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