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जो नहीं बिकेगा उसे खरीदेंगे बैंक
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 29 Oct 2013 12:36 PM IST
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वित्त मंत्रालय की सख्ती के बाद डूबते कर्ज की रिकवरी के लिए बैंक अब अपने नए हथियार को तेजी से अपनाने की तैयारी में हैं। बैंक इसके तहत नीलाम न होने वाली प्रॉपर्टी को खुद खरीदेंगे, जिससे कि बाद में उसे बेचकर अपने कर्ज की वसूली कर सकें।
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बैंकर्स के अनुसार कई बार रसूखदारों की प्रॉपर्टी की नीलामी के लिए कोई खरीदार नहीं आता है। सरफेसी कानून में संशोधन के बाद बैंकों को इस तरह की प्रॉपर्टी खुद खरीदने का अधिकार मिल गया है।
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सरफेसी एक्ट में संशोधन
पंजाब नेशनल बैंक के रिकवरी डिवीजन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सरफेसी एक्ट में संशोधन के जरिए बैंकों को यह अधिकार मिल गया है। ऐसे में अब हमारे लिए प्रॉपर्टी से रिकवरी करना आसान है। इसके तहत यदि किसी प्रॉपर्टी के लिए दो बार नीलामी प्रक्रिया अपनाने के बाद भी कोई खरीदार नहीं आता है, तो बैंक उसको खुद खरीद सकेंगे। अधिकारी के अनुसार बैंक इस तरह की प्रॉपर्टी की पहचान कर जल्द रिकवरी करने की तैयारी कर रहा है।
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पंजाब एंड सिंध बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई बार प्रॉपर्टी की रिकवरी करना बैंक के लिए आसान नहीं होता है। खास तौर से ऐसी प्रॉपर्टी जो किसी रसूखदार की है। कानून में संशोधन से बैंक ऐसी स्थिति में खुद प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं, जिसे बाद में बैंक अपने अनुसार बेच सकता है। इस कदम से निश्चित तौर पर फायदा होगा।
गैर निष्पादित संपत्तियां (एनपीए)
पिछले हफ्ते वित्त मंत्री के साथ सरकारी बैंकों की बैठक में रिकवरी पर खास तौर से जोर देने की बात कही गई है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार बैंक को अपनी एक-एक पाई वसूल करने पर फोकस करने को कहा गया है। सरकारी बैंकों की जून 2013 तक सकल गैर निष्पादित संपत्तियां (एनपीए) 1.76 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं। इसे देखते हुए वित्त मंत्रालय ने बैंकों को खास तौर से अपने 30 बड़े डिफॉल्टर की कर्ज वसूली पर प्रमुख जोर देने को कहा है।
सरकारी बैंकों की रिकवरी गिरी
साल 2012-13 में बैंकों द्वारा रिकवरी दर कम होकर 23.13 फीसदी रही है। जबकि यह दर साल 2009-10 में 36.6 फीसदी रही थी। यानी, पिछले तीन साल बैंक कम रिकवरी कर पा रहे हैं। अब बैंकों को खुद प्रॉपर्टी खरीदने का अधिकार मिलने से रिकवरी में सुधार हो सकता है।