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बैंकों के फंस गए 1.43 लाख करोड़ रुपए

Fri, 28 Feb 2014 01:17 PM IST
प्रशांत श्रीवास्तव/अमर उजाला,दिल्ली
प्रशांत श्रीवास्तव/अमर उजाला,दिल्ली Updated Fri, 28 Feb 2014 01:17 PM IST
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bank's npa reachs on 1.43 lakh crore rupee

कर्ज लेकर न वापस करने वालों की बढ़ती संख्या के चलते बैंकों के 1.43 लाख करोड़ रुपए फंस गए हैं।

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वित्त मंत्रालय और आरबीआई की कर्ज रिकवरी की कोशिशें नाकाम होती दिख रही हैं। बैंकों का अकेले डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल में ही 1.43 लाख करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है। जो कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती और बैंकों की बढ़ती गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के अंत तक कहीं ज्यादा बढ़ने की आशंका है। डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) में 10 लाख रुपये से ज्यादा के मामले पहुंचते हैं।

वित्त मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार देशभर में स्थित 33 डीआरटी में मार्च 2013 तक 42,819 मामले लंबित हैं। इनमें करीब 1.43 लाख करोड़ रुपये बैंकों का बकाया है। बैंकर्स के अनुसार अर्थव्यवस्था में सुस्ती और ट्रिब्यूनल में स्टॉफ पर्याप्त न होने का असर रिकवरी पर हो रहा है। मामले लंबित होते जा रहे हैं, जिसका असर बैंकों के एसेट पर तेजी से हो रहा है।
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बैंकर जीएस बिंद्रा ने अमर उजाला को बताया कि डीआरटी में 10 लाख रुपये से ज्यादा के वसूली के मामले जाते हैं। डीआरटी का उद्देश्य यह था कि बैंकों को रिकवरी में आ रही दिक्कत को जल्द से जल्द दूर किया जाए। इसमें छह महीने के अंदर मामले को निपटारा करने की बात भी शामिल थी, पर जिस तरह मामलों की संख्या बढ़ी है उसकी वजह से अब मामले निपटाने में भी देरी हो रही है।
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अप्रैल 2012 में डीआरटी में कुल 35,221 मामले थे, जो कि मार्च 2013 तक 42,819 तक पहुंच गए हैं। एक साल के दौरान 9,816 मामलों का निपटारा किया गया है। इंडियन बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कर्ज वसूली में बैंकों के लिए डीआरटी और सारफेसी कानून का प्रावधान है। डीआरटी में मार्गेज वाली संपत्ति भी आती हैं, जहां बैंकों की संपत्ति बेचने के बाद भी कर्ज की राशि बची रहती है। ऐसे में बिना मार्गेज के अलावा इस तरह के मामलों की भी संख्या हाल में बढ़ी है।


बैंकों की सेहत के लिए नहीं है अच्छा
बैंकों के एनपीए की जानकारी जुटाने वाले वेब पोर्टल एनपीएसोर्स डॉट कॉम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसंबर तक की अवधि में 40 प्रमुख बैंकों का एनपीए 35.2 फीसदी बढ़कर 2,43,210 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

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