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बैंकों के डूबे 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा, मिलेंगे कैसे?

Fri, 31 Jan 2014 02:23 PM IST
Updated Fri, 31 Jan 2014 02:23 PM IST
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bank npa reached 2.30 lakh crore rupee
करीब 2.30 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब चुके बैंकों के कर्ज ने अब भारतीय रिजर्व बैंक को नई रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है।
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रिजर्व बैंक अब सबसे ज्यादा जोर बड़े कर्जदारों पर दे रहा है, जो कर्ज चुकाने में आनाकानी कर रहे हैं।

रिजर्व बैंक बैंकों के साथ मिलकर इनकी निगरानी करेगा। साथ ही लोन भरने में लापरवाही बरतने वाले कर्जदारों के लिए आगे कर्ज लेना महंगा भी होगा।

डूबते कर्ज पर लगाम कसने की कवायद

bank npa reached 2.30 lakh crore rupee

बृहस्पतिवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने डूबते कर्ज पर लगाम कसने की कवायद के तहत बैंकों के लिए नए नियम जारी कर दिए हैं।

नए नियम एक अप्रैल 2014 से लागू होंगे। इसके तहत रिजर्व बैंक बड़े कर्ज वाले खातों की निगरानी के लिए एक सेंट्रल रिपॉजिटरी बनाएगा।

इसमें पांच करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज लेने वाले खाताधारकों की जानकारी होगी। इसके अलावा बैंकों को खराब हो रहे एसेट को एनपीए बनने से पहले स्पेशल मेंशन अकाउंट के नाम से वर्ग बनाना होगा।

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रिजर्व बैंक के साथ जानकारी साझा करनी होगी

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रिजर्व बैंक की सेंट्रल रिपॉजिटरी में बैंकों के अलावा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को भी रिजर्व बैंक के साथ जानकारी साझा करनी होगी।

इसके अलावा ऐसे कर्ज जिसकी ईएमआई से 61-90 दिनों से नहीं मिल रही है, उस तरह के खातों के लिए बैंकों को मिलकर एक संयुक्त कर्जदाता फोरम बनानी होगी।

जिसकी वसूली के लिए बैंक तेजी से कार्रवाई करने के कदम उठा सकेंगे। जिसमें बैंकों के कंसोर्शियम नियम भी लागू हो सकेंगे। हालांकि संयुक्त कर्जदाता फोरम प्रमुख रूप से 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज पर बनाना अनिवार्य होगा।

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कर्ज लेना बहुत कठिन होगा

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रिजर्व बैंक के प्रस्ताव के तहत ऐसे प्रमोटर और डायरेक्टर के लिए कर्ज लेना बहुत कठिन होगा, जिनका नाम कई बैंकों में जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाले की सूची में शामिल है।

आरबीआई इस तरह के लोगों का डाटा खुद भी तैयार करेगा, जिससे उन पर नजर रखी जा सके।

•बड़े डिफॉल्टरों की होगी अब सख्त निगरानी
•बड़े कर्जदाताओं पर नजर रखने के लिए रिपॉजिटरी
•एनपीए रोकने के लिए बैंक बना सकेंगे साझा फोरम
•कर्ज चुकाने में लापरवाही बरतने वालों को महंगे कर्ज के साथ नया कर्ज लेना होगा मुश्किल
कई बैंकों में डिफॉल्टर होने वाले प्रमोटर, डायरेक्टर पर रिजर्व बैंक सीधे रखेगा नजर

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