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बांग्लादेश, मलेशिया खा रहे भारत का प्याज

Thu, 03 Jul 2014 09:42 PM IST
अजीत सिंह / अमर उजाला दिल्ली
अजीत सिंह / अमर उजाला दिल्ली Updated Thu, 03 Jul 2014 09:42 PM IST
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bangladesh, malaysis eating INDIA ONION.

देश में भले ही प्याज को लेकर हाहाकार मचा है, लेकिन बांग्लादेश, मलेशिया, श्रीलंका और खाड़ी के देश भारत का सस्ता प्याज मजे से खा रहे हैं।

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पिछले 15 दिनों में प्याज की बढ़ी कीमतों के लिए जमोखारी से ज्यादा इसका निर्यात जिम्मेदार है। केंद्र सरकार भी प्याज के इस खेल का समझ चुकी है, इसलिए बार-बार न्यूनतम निर्यात मूल्य बढ़ाया जा रहा है। अगर निर्यात पर अंकुश नहीं लगा तो जल्द ही सरकार को प्याज के निर्यात पर रोक लगानी पड़ सकती है।
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वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दो हफ्ते पहले प्याज पर 300 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य लागू होने के बावजूद निर्यात नहीं थम रहा है। इसलिए दोबारा निर्यात मूल्य बढ़ाकर 500 डॉलर करने का फैसला किया गया।
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इस दौरान खुदरा बाजार में प्याज का भाव 15-20 रुपये किलो से बढ़कर 35-40 रुपये किलो तक पहुंच गया है। पिछले साल अंतरराष्टïरीय बाजार में प्याज का अच्छा भाव मिलने केनिर्यातकों ने करीब 3169 करोड़ रुपये की कमाई की थी। सबसे ज्यादा निर्यात बांग्लादेश, मलेशिया, श्रीलंका और यूएई को हुआ था।

वर्ष 2013-14 में इन चारों देशों को भारत से करीब 10 लाख टन प्याज भेजा गया, जबकि प्याज का कुल निर्यात करीब 15 लाख टन था। यानी एक तरह देश की जनता 80-90 रुपये किलो का प्याज खाने को मजबूर थी, जबकि लाख टन प्याज विदेश भेजा जा रहा था।


नेशनल हॉर्टिकल्चर रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक आरपी गुप्ता का कहना है कि इस साल प्याज का खूब निर्यात हो रहा है, जिसके चलते घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ती जा रही है।

इस साल भी इनकी नजर प्याज के निर्यात पर है। प्याज कीमतों की समीक्षा करने वाले अंतर-मंत्रालय समूह ने भी माना है कि गत 18 जून को प्याज पर 300 डॉलर का एमईपी लगाने के बावजूद निर्यात कम नहीं हुआ है। आजादपुर मंड़ी समिति के सदस्य राजेंद्र शर्मा का कहना है कि प्याज ऐसी वस्तु नहीं जिसकी लंबे समय तक जमाखोरी की जा सके। प्याज की महंगाई केपीछे जमाखोरी से ज्यादा इसके निर्यात का खेल है।

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