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छह साल में पहली बार गिरा ऑटो पार्ट्स कंपनियों का कारोबार

Fri, 18 Jul 2014 09:00 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Fri, 18 Jul 2014 09:00 AM IST
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Auto parts companies's revenue falls for the first time in six years

वाहनों के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों के कारोबार में 2013-14 के दौरान पिछले छह वित्त वर्ष के दौरान पहली बार गिरावट आई है। इसकी मुख्य वजह वाहनों की बिक्री में कमी, बढ़ती लागत, ऊंची ब्याज दरें और निवेश में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट रही।

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ऑटोमोबाइल कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन (एसीएमए) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष के दौरान ऑटो पार्ट्स उद्योग में कुल 2,117 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ, जो वित्त वर्ष 2012-13 के 2,160 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 2 फीसदी कम है। पिछले वित्त वर्ष से पहले लगातार चार साल इसमें बढ़ोतरी हुई थी।
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एसीएमए के अध्यक्ष हरीश लक्ष्मण ने बताया कि देश में इस समय ब्याज दरें दुनिया के किसी अन्य देश के मुकाबले अधिक हैं, जिससे पूंजी लागत बढ़ रही है। साथ ही निवेश गिरकर पांच साल के न्यूनतम स्तर 32 से 44 करोड़ रुपये के बीच रह गया। वित्त वर्ष 2012-13 में यह 69 से 95 करोड़ रुपये के बीच था। हालांकि, बुरा वक्त अब पीछे छूट चुका है और वाहनों की बिक्री एक बार फिर रफ्तार पकड़ रही है। आने वाले समय में ऑटो पार्ट्स के कारोबार को भी गति मिलेगी।
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लक्ष्मण ने कहा कि इस दौरान अच्छी बात यह रही कि निर्यात में 16.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और यह 2012-13 के 526 करोड़ रुपये से बढ़कर 614 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, आयात भी 744 करोड़ रुपये से बढ़कर 771 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

चालू वित्त वर्ष में 4-6 फीसदी की दर से बढ़ेगी इंडस्ट्री
एसीएमए का कहना है कि चालू वित्त वर्ष 2014-15 में ऑटो पार्ट्स उद्योग की विकास दर 4 से 6 फीसदी रहने की उम्मीद है, जबकि वित्त वर्ष 2015-16 में इसकी वृद्धि दर 10 फीसदी पहुंच सकती है। एसीएमए के उपाध्यक्ष रमेश सूरी ने बताया कि पिछले दो साल की मंदी से उबरने में उद्योग को समय लगेगा और चालू वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही में सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है। बिजली और आधारभूत ढांचा इंडस्ट्री के सामने दो सबसे बड़ी समस्या है। नई सरकार आने के बाद उन्होंने इस दिशा में नीतियों में बदलाव की उम्मीद की।


चीन के बढ़ते कब्जे ने बढ़ाई चिंता
भारतीय ऑटो पार्ट्स बाजार में चीन के बढ़ते कब्जे ने वाहनों के कलपुर्जे बनाने वाली घरेलू कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इससे कैसे निपटा जाए। एसीएमए के अध्यक्ष हरीश लक्ष्मण का कहना है कि इस क्षेत्र में चीन से आयात लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान कुल 771 करोड़ रुपये के वाहनों के कलपुर्जों का आयात किया गया, जिसमें सबसे ज्यादा 20.97 फीसदी आयात चीन से किया गया। लक्ष्मण ने कहा कि चिंता की बात यह है कि 614 करोड़ रुपये के निर्यात में चीन की खरीदारी महज 3.04 फीसदी है। हमें यह सोचना होगा कि इसे किस तरह बदला जाए।

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