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रेटिंग एजेंसियों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे वित्त मंत्री

Mon, 28 Jul 2014 09:21 PM IST
सुजय मेहदूदिया/नई दिल्ली
सुजय मेहदूदिया/नई दिल्ली Updated Mon, 28 Jul 2014 09:21 PM IST
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Arun Jaitley to meet global credit rating agencies

वित्त मंत्री अरुण जेटली आने वाले दिनों में वैश्विक रेटिंग एजेंसियों एसएंडपी, फिच और मूडीज के प्रतिनिधियों से मिलकर भारत की रेटिंग बढ़ाने को लेकर बात करेंगे। वित्त मंत्री की यह कवायद भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों का भरोसा दोबारा बहाल करने और निवेश के माहौल को रफ्तार देने के मद्देनजर होगी।

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वित्त मंत्री राजकोषीय घाटे को कम करने का अपना वित्तीय लक्ष्य पहले ही तैयार कर चुके हैं और वह विदेशी और घरेलू निवेशकों तक एक सकारात्मक संदेश पहुंचाने के लिए भारत की रेटिंग तत्काल बढ़ाने को लेकर सरकार का पक्ष रखेंगे। रेटिंग बढ़ने से निवेशकों के बीच यह स्पष्ट संदेश जा सकेगा कि भारत निवेश के लिए अब एक उत्कृष्ट जगह है। उपलब्ध सूचनाओं के मुताबिक स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) और दी जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (जेसीआरए) के प्रतिनिधियों की वित्त मंत्री अरुण जेटली और उनके मंत्रालय के अधिकारियों से 12 अगस्त और 28 अगस्त को मुलाकात निर्धारित है।
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इसी तरह, रेटिंग एजेंसी फिच और मूडीज के प्रतिनिधि सितंबर या अक्तूबर में भारत आएंगे, तबतक सरकार को यह उम्मीद है कि बजट में पेश किए गए सुधार के एजेंडों का असर दिखना शुरू हो जाएगा। माना जा रहा है कि जेटली भारत की रेटिंग अपग्रेड कराने के लिए रेटिंग एजेंसियों के समक्ष यह तर्क देंगे कि सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश बढ़ाने के लिए न केवल तमाम कदम उठाए हैं, बल्कि वित्तीय घाटा नियंत्रित करने और गैरजरूरी खर्चों में कटौती करने के भी उपाय किए हैं।
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सरकार रेटिंग एजेंसियों के सामने यह पक्ष भी रख सकती है कि वह फरवरी 2015 में प्रस्तावित अगले आम बजट से पहले भारी भरकम सब्सिडी बिल को कम करने के लिए एक व्यवस्था ला सकती है। इसके साथ ही पूरी प्रणाली को इस तरह व्यवस्थित किया जाएगा कि सब्सिडी का लाभ केवल तय लाभार्थियों को ही मिले।

अधिकारियों के मुताबिक वित्त मंत्रालय रेटिंग एजेंसियों को इस बात को लेकर प्रभावित करेंगे कि सरकार वित्तीय घाटे को इस साल 4.1 फीसदी पर नियंत्रित रखेगी और 2016-17 तक इसे घटाकर 3 फीसदी पर लाएगी।


एसएंडपी ने फिलहाल भारत की रेटिंग ‘बीबीबी-’ (नकारात्मक आउटलुक के साथ न्यूनतम निवेश ग्रेड) रखी है। यदि रेटिंग में आगे गिरावट होती है तो इससे भारत की रेटिंग ‘जंक’ श्रेणी में पहुंच जाएगी। जिससे भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी जुटाना मुश्किल और महंगा हो जाएगा। वहीं, मूडीज ने भारत की रेटिंग स्टेबल आउटलुक के साथ ‘बीएए3’ दी है। जबकि, फिच ने भारत की लांग टर्म विदेशी और घरेलू मुद्रा इश्युअर डिफॉल्ट रेटिंग ‘बीबीबी-’ बनाए रखी है और आउटलुक स्टेबल रखा है।

अपनी रिसर्च रिपोर्ट में ब्रोकरेज फर्म मार्गन स्टेनली ने अनुमान जताया है कि भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग अगले 12 माह के दौरान स्टेबल बनी रहेगी।

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