जेटली ने बताया, लोगों को कैसे राहत देगा बजट?
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मोदी सरकार के पहले बजट पर देश के हर नागरिक ही नहीं बल्कि दुनिया भर की निगाहें लगी थीं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में अपना पहला बजट पेश करने के बाद ‘अमर उजाला’ के एम.के. वेणु से बजट को लेकर खास बातचीत की। पेश है इसके अंश।
बजट में सीधे तौर पर 50 हजार रुपये के स्लैब को आयकर छूट में बढ़ाया गया है। ढाई लाख की आयकर सीमा के साथ निवेश सीमा भी डेढ़ लाख रुपये की गई है।
साथ ही होम लोन पर अदा किए जाने वाले ब्याज पर छूट की सीमा भी बढ़ा दी गई है। बुजुर्गों के स्लैब को तीन लाख रुपये कर दिया गया है। इन उपायों से लोगों के हाथ में कुछ पैसा तो आएगा, जिससे महंगाई का सामना करने में मदद मिलेगी।
अपने पहले बजट पर
यह बजट महज छह सप्ताह में तैयार किया गया है और यह यात्रा की शुरुआत है। फिलहाल इस बजट के वास्तविक पहलुओं पर गौर करने की जरूरत है।
हम जीएसटी लागू करने का निर्णय ले चुके हैं और सभी पहलुओं पर व्यापक स्तर पर गौर किया जा चुका है। राज्यों के साथ सहमति लगभग हो गई है। मगर जहां तक जीएसटी की दर का सवाल है तो अभी मैं इसका खुलासा नहीं करना चाहूंगा।
हमने रेट्रोस्पेक्टिव उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है, जो कर विवाद के समाधान में अहम भूमिका निभाएगी। हम बेवजह के विवादों को बढ़ावा नहीं देंगे। निवेश का माहौल बढ़ाने और विकास दर को गति देने के लिए डर नहीं बल्कि अनुकूल माहौल की जरूरत है। जहां तक कोर्ट में चल रहे पुराने विवादों का सवाल है उसमें हम कोई दखल नहीं देंगे।
ऊर्जा क्षेत्र में सुधार
इस क्षेत्र के विकास के लिए बहुआयामी कदम उठाने का निर्णय लिया है। विद्युत सेक्टर के विकास के लिए कोयले की समुचित आपूर्ति और सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कर में कमी की गई है। इस सेक्टर में लागत को और पारदर्शी किए जाने की जरूरत है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती-घटती कीमतों के साथ रुपये के वैश्विक स्तर पर बढ़ने-घटने का प्रभाव तो सीधे तौर पर रहता है। लेकिन इस पर राज्यों की ओर से लगाए जाने वाले टैक्स भी कम नहीं है। इसलिए इसमें ज्यादा गुंजाइश नहीं है।
इन संस्थानों के मसले पर किसी भी तरह का पक्षपात नहीं किया गया है। जहां भाजपा की सरकार नहीं है, उन राज्यों में भी इन संस्थानों की स्थापना का प्रस्ताव है। पूरी तरह से सही रवैया अपनाया गया है, दरअसल मैं इस क्षेत्र में किसी भी तरह का विवाद नहीं लाना चाहता। इसलिए सभी राज्यों को हम एम्स जैसा संस्थान देंगे तो बजट में जिन एक्सीलेंस संस्थानों का ऐलान हुआ है उसमें झारखंड से लेकर महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश-तेलंगाना से लेकर उत्त्तराखंड शामिल हैं।
महंगाई के संदर्भ में
सरकार इस पर गौर कर रही है कि किस तरह से मंहगाई पर नियंत्रण रखा जाए। महंगाई को काबू में रखने के लिए मुद्रास्फीति पर संतुलन कायम रखना प्रमुख है। जहां तक मानसून के कमजोर होने की बात सामने आई है तो हमारे पास अभी दो हफ्ते हैं और हम जुलाई के दूसरे सप्ताह तक इंतजार कर सकते हैं।
कोल ब्लॉक एक व्यापक मसला है, इसके लिए प्राधिकारों को और जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए। यह बड़े बहस का मुद्दा है। सबसे बेहतर यही है कि कोल ब्लॉक की नीलामी की जाए ताकि भेदभाव का कोई स्थान ही नहीं बचे। जहां तक 3जी स्पेक्ट्रम नीलामी का सवाल है उसमें कोई विवाद नहीं है।
दरअसल हमारे देश में एक संस्थान सभी लाइसेंस रद्द करने के लिए कहता है। इसके बाद लोग बचने का प्रयास करते हैं। कुछ लोग कानून को तोड़ते हैं, जबकि वह जिम्मेदार हैं। लेकिन इसके चलते लोगों को नुकसान होता है, जो उचित नहीं है।
सब्सिडी के बारे में
वास्तविक लोगों तक छूट को पहुंचाए जाने की जरूरत है। इसके लिए आधार से जोड़े जाने की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता। यदि आधार के सहारे लीकेज को रोकते हुए वांछित वर्ग तक लाभ पहुंच सकता है तो इस पर गौर हो सकता है। इसे तर्कसंगत बनाए जाने की जरूरत है। व्यय आयोग ने कुछ सिफारिशें की हैं, उस पर कदम उठाकर जरूरतमंदों तक छूट को मुहैया कराया जाएगा।
महज बाजार की अर्थव्यवस्था के आधार पर गरीब वर्ग को कारण नहीं गिनाए जा सकते। जैसा कि यूपीए सरकार ने किया था, जो गलत था और इसी के चलते वह स्थिति को संभालने की बजाय सब कुछ गवां बैठे। यह अहम बात है कि सरकार का खजाना जनता के लिए है।