मुश्किल हालातों में जेटली ने पेश किया बेहतरीन बजट
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अर्थव्यवस्था में सुधार का आधार तैयार कर लिया है। बजट की घोषणाओं के मुताबिक अर्थव्यवस्था के सभी सेक्टरों में विश्वास बहाली के लिए अल्पावधि और दीर्घावधि, दोनों तरह के कदम उठाए गए हैं।
दरअसल, वित्त मंत्री ने मुश्किल दौर में बजट पेश किया है। इसके बावजूद उन्होंने ऐसे कदमों की घोषणा की है, जो अगले दो-तीन साल के दौरान विकास दर में रफ्तार का आधार बन सकती हैं। उद्योग जगत चाहता था कि सरकार उस पर नए टैक्स थोपने की कोशिश से बाज आए।
सरकार ने उद्योग की इस चिंता को समझा है और पहले से चले आ रहे टैक्स प्रावधानों में कोई बदलाव न करने का वादा किया है। इससे टैक्स नियमों की अनिश्चितता खत्म होगी और इसमें एक स्थिरता आएगी। निवेशकों के लिए सरकार का यह कदम काफी मुफीद साबित होगा और इससे उन्हें निवेश करने में हिचकिचाहट नहीं होगी। जाहिर है निवेशकों के माकूल टैक्स नियमों से निवेश बढ़ेगा और ग्रोथ को रफ्तार मिलेगी।
निवेशकों को प्रोत्साहन देना जरूरी
वित्त मंत्री ने पूंजी निर्माण के मद्देनजर भी अहम कदम उठाए हैं। सरकार ने इसके लिए निवेशकों को प्रोत्साहन देना जरूरी समझा। यही वजह है कि उन्होंने निवेशकों को निवेश भत्ता प्रोत्साहन देने के लिए निवेश सीमा 100 करोड़ रुपये से घटा कर 25 करोड़ रुपये कर दी गई है।
इससे लघु और मध्यम उद्योगों (एसएमई) को सबसे ज्यादा फायदा होगा। लघु और मध्यम उद्योग देश में सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करने वाला सेक्टर है। साथ ही वस्तुओं के निर्यात में भी इसकी बड़ी भागीदारी है। सरकार ने महंगाई को काबू करने पर भी पूरा ध्यान दिया है। मूल्य स्थिरता कोष की स्थापना इस दिशा में एक अहम कदम है।
राज्यों के साथ मिलकर एपीएमसी नियमों को एक नई दिशा देने की प्रतिबद्धता जता कर भी सरकार ने यह साबित कर दिया है कि वह महंगाई को काबू करने के प्रति गंभीर है। सरकार का इरादा किसानों के उत्पादों को लिए प्राइवेट मार्केट यार्ड और बाजार मुहैया कराना है।
सरकार ने मनरेगा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए कहा है कि वह इसे ऐसे उत्पादक कार्यों से जोड़ेगी, जिससे संपत्ति का निर्माण हो। सरकार मनरेगा को कृषि और सहायक गतिविधियों से भी जोड़ेगी।