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GST का उलझा पेंच सुलझाने में लगे जेटली

Thu, 29 May 2014 06:52 PM IST
Updated Thu, 29 May 2014 06:52 PM IST
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arun jaitley now works on gst

वित्त मंत्रालय का जिम्मा संभालने के साथ ही अरुण जेटली गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के मुद्दे को फास्ट-ट्रैक पर लाने में जुट गए हैं।

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कुछ बड़े आर्थिक सुधारों को जल्द से जल्द अमल में लाने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सबसे पहले जीएसटी को चुना है। लंबे समय से अटके इस मामले पर उन्होंने बुधवार को राजस्व विभाग के आला अधिकारियों की बैठक बुलाकर अब तक हुई प्रगति की जानकारी मांगी।
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जेटली ने जीएसटी पर आम राय बनाने के लिए राज्यों के वित्त मंत्रियों से जल्द मुलाकात के संकेत दिए हैं।

क्यों हो रही है जीएसटी लागू करने में देरी?

arun jaitley now works on gst

वित्त मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, राजस्व सचिव राजीव टकरू बृहस्पतिवार को जीएसटी पर अब तक हुई प्रगति और राज्यों की समस्याएं दूर करने के उपाय पर वित्त मंत्री को एक प्रजेंटेशन देंगे। गौरतलब है कि यूपीए सरकार इस मामले को अटकाने के लिए भाजपा शासित राज्यों को दोषी ठहराती थी।

अब भाजपा सरकार पर राज्यों के साथ मतभेद दूर कर इस अहम आर्थिक सुधार को लागू करने की जिम्मेदारी है। वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राजस्व विभाग ने राज्यों की दिक्कतें दूर करने के लिए कुछ कारगर उपाय सुझाएं हैं, जिससे जीएसटी की राह आसान हो सकती है। अरुण जेटली ने भी इस मामले को जल्द से जल्द आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

कारोबार मे होगी आसानी

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इस सिलसिले में जल्द वित्त मंत्री की राज्यों के वित्त मंत्रियों से मुलाकात हो सकती है। लेकिन इससे पहले जेटली राज्यों की समस्याओं के पुख्ता समाधान का खाका तैयार कराना चाहते हैं।

अप्रत्यक्ष करों की इस नई प्रणाली के लागू होने से केंद्र और राज्य के अलग-अलग करों के बजाय वस्तु एवं सेवाओं से जुड़ा एक समान कर ढांचा तैयार होगा। इससे कारोबार करने में आसानी होगी और राजस्व संग्रह बढ़ने की उम्मीद है।

लेकिन जीएसटी के लागू होने से राज्यों को होने वाले राजस्व घाटे की भरपाई जैसे मसले पर मामला अटका हुआ है।

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