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प्रशिक्षुओं को मिल सकेगा ज्यादा मासिक भुगतान

Mon, 18 Aug 2014 12:20 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Mon, 18 Aug 2014 12:20 AM IST
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apprentices will get more stipend
संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन लोकसभा ने प्रशिक्षु (अप्रेंटिसेज) (संशोधन) विधेयक 2014 पारित कर दिया।
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इस विधेयक में कानून बन जाने के बाद देश में कुशल कर्मियों की उपलब्धता बढ़ जाएगी। कंपनियों के लिए प्रशिक्षु के नियुक्ति की प्रक्रिया आसान हो जाएगी और प्रशिक्षुओं को अधिक मासिक भुगतान मिल सकेगा। विधेयक राज्य सभा में पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन जाएगा।

नया कानून बनने पर प्रशिक्षुओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके तहत प्रशिक्षुओं के मासिक भुगतान को अर्द्धकुशल औद्योगिक श्रमिकों के वेतन से जोड़ने और उनके काम के घंटे और अवकाश लाभ संगठित क्षेत्र के नियमित कर्मचारियों के समान करने के प्रावधान किए गए हैं।
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नए कानून में कंपनियों को गैर-इंजीनियर को भी प्रशिक्षु के तौर पर नियुक्त करने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा कंपनियां प्रशिक्षु प्रशिक्षण के लिए नए ट्रेड्स भी शुरू कर सकेंगी। विधेयक के प्रावधानों के तहत सरकार छोटे और मझोले उद्योगों (एसएमई) को पहले दो वर्ष प्रशिक्षुओं को दिए जाने वाले मासिक भुगतान का 50 फीसदी वितरित करेगी। एसएमई कंपनियों को प्रशिक्षु रखने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से यह प्रावधान किया गया है।
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इसके अलावा कंपनियों पर नियमों के उल्लंघन पर कैद से राहत देकर जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
श्रम एवं रोजगार मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मौजूदा समय में भारत में हजारों कंपनियों में 4,90,000 प्रशिक्षुओं की क्षमता है। नया कानून लागू हो जाने के बाद देश में प्रशिक्षुओं की सीट बढ़ कर 23 लाख तक हो सकती है।

विधेयक के मुताबिक कंपनियों को अपने कुल कर्मचारियों की संख्या का 2.5-10 फीसदी तक प्रशिक्षु रखना होगा। पांच या इससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियां प्रशिक्षु रख सकेंगी। इससे देश में प्रशिक्षुओं की संख्या में तेजी से इजाफा होगा। भारत में प्रशिक्षुओं की संख्या बढ़ाने पर जोर देते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जर्मनी में प्रशिक्षुओं की संख्या 30 लाख और चीन में प्रशिक्षुओं की संख्या 2 करोड़ है।

उन्होंने कहा कि भारत को विभिन्न उद्योगों के लिए कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। विधेयक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन स्किल इंडिया के अनुरूप है। श्रम एवं रोजगार मंत्री ने कहा कि समय के साथ कुछ कानून पुराने पड़ चुके हैं और इन्हें समकालीन बनाने के लिए संशोधन करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में प्रशिक्षुओं को 1,900-2,300 रुपये मासिक भुगतान मिलता है। नया कानून लागू हो जाने के बाद इसमें बड़े पैमाने पर इजाफा होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षुओं के मासिक भुगतान को अर्द्धकुशल औद्योगिक कर्मचारी के वेतन से जोड़ा जा रहा है।

पहले वर्ष प्रशिक्षुओं को अर्द्धकुशल कर्मचारी के वेतन का 70 फीसदी, दूसरे वर्ष अर्द्धकुशल कर्मचारी के वेतन का 80 फीसदी और तीसरे वर्ष अर्द्धकुशल कर्मचारी के वेतन का 90 फीसदी मासिक भुगतान मिलेगा। सत्ता में आने के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने पुराने श्रम कानूनों में सुधार की पहल की है।


 विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने श्रम कानून मैन्यूफैक्चरिंग में ग्रोथ और देश में रोजगार के अवसर पैदा करने की राह में बाधक हैं। प्रशिक्षु संशोधन विधेयक के अलावा सरकार ने 7 अगस्त को संसद में फैक्ट्रीज एक्ट भी पेश किया है।
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