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संधू के स्थानांतरण से टल गई बैंक प्रमुखों की नियुक्ति

Fri, 07 Nov 2014 09:17 AM IST
नई दिल्ली/ शिशिर चौरसिया
नई दिल्ली/ शिशिर चौरसिया Updated Fri, 07 Nov 2014 09:17 AM IST
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appointment of bank chiefs delayed due to Sandhu's transfer

वित्त मंत्रालय में बैंकिंग विभाग के सचिव गुरदयाल सिंह संधू का स्थानांतरण क्या हुआ, सरकारी बैंकों के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकों की नियुक्ति के लिए होने वाला साक्षात्कार भी टल गया। साक्षात्कार टलने से कुछ बैंकों का बड़ा नुकसान होगा क्योंकि बिना प्रमुख के इनके यहां कई महत्वपूर्ण फैसले अटके पड़े हैं। इस समय 7 सरकारी बैंकों में अध्यक्ष के बगैर कामकाज हो रहा है जबकि एक और बैंक के अध्यक्ष अगले महीने रिटायर होने वाले हैं।

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पिछले सोमवार को देर शाम संधू का स्थानांतरण कर उनकी जगह पर गुजरात कैडर में 1981 बैच के आईएएस अधिकारी हसमुख अधिया को नियुक्त कर दिया गया था। हालांकि अधिया ने अभी तक वित्त मंत्रालय में कार्य ग्रहण नहीं किया है, इसलिए संधू भी कार्यमुक्त नहीं किए गए हैं। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार को अधिया कार्यभार संभाल लेंगे। यदि ऐसा होता है तो उसी दिन संधू कार्य मुक्त कर दिए जाएंगे।
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बैंकिंग सचिव के रूप में अधिया ने कार्य ग्रहण भले ही नहीं किया हो, लेकिन आठ बैंकों के लिए नए अध्यक्षों के लिए होने वाले साक्षात्कार को अब टाल दिया गया है। पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार इसी महीने 13 और 14 तारीख को आठ बैंकों के सीएमडी के लिए साक्षात्कार होना था जिसमें भाग लेने के लिए 16 अधिकारी योग्य पाए गए हैं।
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वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि जब सरकार ने संधू को बैंकिंग विभाग से हटा दिया है तो फिर उनकी योजनानुसार साक्षात्कार लेने का कोई मतलब नहीं रह जाता। वैसे ही पिछले महीने ही सरकार ने उन छह अधिकारियों के पैनल को रद्द कर दिया था, जिसे सीएमडी के लिए संधू के कार्यकाल में चुना गया था। उनके मुताबिक नए सचिव शुक्रवार को कार्यभार संभाल सकते हैं। एक बार वह मंत्रालय में आ जाएं, उसके बाद तय किया जाएगा कि चयन प्रक्रिया के मानक क्या हों, कौन-कौन इसके लिए योग्य हैं।

उल्लेखनीय है कि यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक, सिंडिकेट बैंक, केनरा बैंक और ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के सीएमडी का चयन हो गया था लेकिन अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में सरकार ने चयनित अधिकारियों के पैनल को रद्द कर दिया। उसी के बाद संधू के स्थानांतरण का फैसला भी उजागर हो गया। यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया में सीएमडी का पद इस वर्ष फरवरी से ही खाली है जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन ओवरसीज बैंक के सीएमडी का पद अगस्त 2014 से खाली है।

बीते सितंबर में सिंडीकेट बैंक के अध्यक्ष का पद खाली हो गया तो अक्तूबर 2014 से केनरा बैंक और ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के सीएमडी का पद खाली है। पिछले 27 अक्तूबर को पंजाब नेशनल बैंक के सीएमडी भी रिटायर हो गए जबकि आगामी दिसंबर में विजया बैंक के सीएमडी रिटायर हो रहे हैं। इस प्रकार से कुल आठ बैंकों के लिए सीएमडी का चयन किया जाना है।


बैंकिंग क्षेत्र के विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह से सीएमडी का पद खाली रहने से बैंक के कामकाज पर बुरा प्रभाव पड़ता है। प्रमुख विहीन रहने के कारण बैंकों में बड़े फैसले नहीं हो पाते, जिस वजह से कारोबारी प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ता है। इस समय सरकारी बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) भी रिकॉर्ड बढ़ कर 2.60 लाख करोड़ रुपये के ऊपर चला गया है जो कि इसके कुल अग्रिम के चार फीसदी से भी ज्यादा है।

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