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झांसी, सैफई में भी होगा ‘अपना बाजार’
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Tue, 25 Sep 2012 12:31 PM IST
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ की तर्ज पर अब झांसी और सैफई में भी ‘अपना बाजार’ खोलने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। अगले चरण में प्रदेश के बड़े और प्रमुख शहरों में अपना बाजार खोले जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश की चावल निर्यात नीति की मंजूरी देने के साथ ही कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी सोमवार को किए गए। मुख्यमंत्री मंडी परिषद के संचालक मंडल की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
अखिलेश ने कहा किसानों को अपनी उपज सीधे उपभोक्ताओं को बेचने की सुविधा दिए जाने के लिहाज से अपना बाजार की महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां पर होने वाली फुटकर बिक्री पर मंडी शुल्क नहीं लगता है। हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम के दस्तकारों को भी अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और उन्हें बेचने का अवसर दिया जाता है।
सीएम ने निर्देश दिए कि मंडी परिषद ऐसे बाजारों को विकसित करे, जिनमें किसान सीधे और आसानी से अपनी कृषि उपज का विक्रय कर सकें और उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर कृषि उपज उपलब्ध हो सके। चावल निर्यात नीति की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके अंतर्गत निर्यात किए जाने वाले चावल को मंडी शुल्क से मुक्त रखे जाने का प्रस्ताव किया गया है।
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अन्य प्रमुख फैसले
-10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के जो भी निर्माण कार्य मंडी परिषद कराएगा, उसकी ई-टेंडरिंग कराई जायेगी।
-किसानों के ऐसे पुत्र-पुत्रियों को मंडीपरिषद की ओर से छह हजार रुपए मासिक छात्रवृत्ति मिलेगी जो कृषि अनुसंधान कर रहे हैं।
- गुड़, खांडसारी इकाईयों में मंडी शुल्क समाधान योजना।
-श्रावस्ती के भिनगा में नई सब्जी मंडी बनेगी। गोरखपुर में आधुनिक मत्स्य मंडी विकसित होगी। लखनऊ के दुबग्गा स्थित नवीन सब्जी मंडी का विस्तार किया जाएगा।
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अखिलेश ने कहा किसानों को अपनी उपज सीधे उपभोक्ताओं को बेचने की सुविधा दिए जाने के लिहाज से अपना बाजार की महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां पर होने वाली फुटकर बिक्री पर मंडी शुल्क नहीं लगता है। हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम के दस्तकारों को भी अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और उन्हें बेचने का अवसर दिया जाता है।
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सीएम ने निर्देश दिए कि मंडी परिषद ऐसे बाजारों को विकसित करे, जिनमें किसान सीधे और आसानी से अपनी कृषि उपज का विक्रय कर सकें और उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर कृषि उपज उपलब्ध हो सके। चावल निर्यात नीति की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके अंतर्गत निर्यात किए जाने वाले चावल को मंडी शुल्क से मुक्त रखे जाने का प्रस्ताव किया गया है।
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अन्य प्रमुख फैसले
-10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के जो भी निर्माण कार्य मंडी परिषद कराएगा, उसकी ई-टेंडरिंग कराई जायेगी।
-किसानों के ऐसे पुत्र-पुत्रियों को मंडीपरिषद की ओर से छह हजार रुपए मासिक छात्रवृत्ति मिलेगी जो कृषि अनुसंधान कर रहे हैं।
- गुड़, खांडसारी इकाईयों में मंडी शुल्क समाधान योजना।
-श्रावस्ती के भिनगा में नई सब्जी मंडी बनेगी। गोरखपुर में आधुनिक मत्स्य मंडी विकसित होगी। लखनऊ के दुबग्गा स्थित नवीन सब्जी मंडी का विस्तार किया जाएगा।