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बढ़ती महंगाई से EMI घटने की उम्मीदें खत्म

Tue, 15 Oct 2013 06:19 PM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
एजेंसी/नई दिल्ली Updated Tue, 15 Oct 2013 06:19 PM IST
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analysts expect rbi to hike repo rate not cut emi

थोक महंगाई के साथ-साथ खुदरा महंगाई में आई तेजी से आने वाले दिनों में कर्ज सस्ता होने की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है।

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चौतरफा महंगाई बढ़ने से कार, आवास और अन्य दूसरी मासिक किस्तों में कमी आने की उम्मीद अब समाप्त हो गई है।

वहीं, विश्लेषकों का कहना है कि महंगाई बढ़ने से रिजर्व बैंक अपनी अगली समीक्षा में ब्याज दरों में चौथाई फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने कहा है कि बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए रिजर्व बैंक 29 अक्तूबर को ब्याज दरों में एक चौथाई फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है।

हालांकि, बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए मार्जिनल स्टैंडिग फैसिलिटी (एमएसएफ) दरों में एक चौथाई की फीसदी की कमी किए जाने की उम्मीद है

वित्तीय क्षेत्र की कंपनी जेपी मार्गन ने भी आगामी मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर में चौथाई फीसदी की बढ़ोतरी की संभावना जताई है। उसने कहा है कि थोक एवं खुदरा दोनों महंगाई बढ़ने से रेपो रेट में बढ़ोतरी हो सकती है।
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इसी तरह से क्रेडिट सुईस ने कहा है कि मार्च 2014 तक रेपो दर में 0.50 फीसदी तक की बढ़ोतरी संभव है। उसने कहा है कि चाल वित्त वर्ष के अंत तक खुदरा महंगाई घटकर आठ प्रतिशत पर आ सकती है।
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वित्तीय क्षेत्र की कंपनी नोमुरा ने भी कहा है कि मार्च 2014 तक रिजर्व बैंक रेपो रेट में दो बार बढ़ोतरी कर सकता है। क्रिसिल ने भी रिजर्व बैंक की अगली समीक्षा में रेपो रेट में चौथाई फीसदी की वृद्धि की संभावना जताई है।

बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच ने कहा है कि अगली समीक्षा में आरबीआई रेपो दर में चौथाई की बढ़ोतरी कर सकता है। उसने कहा है कि मार्च 2014 तक खुदरा महंगाई 8.5 फीसदी तक और थोक महंगाई 6.6 फीसदी पर रह सकती है।

विश्लेषकों का कहना है कि जिस तरह से रेपो रेट में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है। उसके मद्देनजर आगे किसी प्रकार की मासिक किस्तों में कमी आने की संभावना समाप्त हो गई है।


रिजर्व बैंक की पहली प्राथमिकता बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करना रहा है और यदि आगे भी यही नीति जारी रही तो कर्ज सस्ता होना मुश्किल हो जाएगा।

सरकार द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार सितंबर में थोक महंगाई 6.46 फीसदी पर पहुंच गई।

अगस्त में यह 6.10 फीसदी रही थी। इसके साथ ही खुदरा महंगाई दर बढ़कर 9.84 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 9.52 फीसदी के स्तर पर थी।

पिछली मौद्रिक समीक्षा में विश्लेषकों एवं अर्थशास्त्रियों को चौंकाते हुए राजन ने अनुमान के उलट रेपो रेट चौथाई फीसदी की बढ़ोतरी कर दी थी जबकि उनके आने के बाद आम लोगों को कार, वाहन और दूसरे कर्ज सस्ते होने की उम्मीद बनी थी।

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