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तापी परियोजना पर छाए संकट के बादल
सुजय मेहदूदिया/नई दिल्ली
Updated Fri, 28 Nov 2014 09:13 AM IST
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भारत-पाकिस्तान-ईरान गैस पाइपलाइन पर अनिश्चितता की धुंध के बीच महत्वाकांक्षी टीएपीआई (तापी) पाइपलाइन से प्राकृतिक गैस हासिल करने की भारत की योजना को झटका लगा है। तुर्कमेनिस्तान सरकार ने अपनी फील्ड से गैस निकालने के लिए प्रोडक्शन शेयरिंग कांट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करने को लेकर अनिच्छा जताई है। इसके अलावा कोई अंतरराष्ट्रीय कंसोर्शियम पाइपलाइन बनाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।
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तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (टीएपीआई) गैस पाइपलाइन अधर में फंस गई है, क्योंकि तुर्कमेनिस्तान का कहना है कि मौजूदा कानून उसके तटवर्ती ईएंडपी ब्लॉक में गैस निकालने के लिए विदेशी कंपनी को प्रोडक्शन शेयरिंग राइट्स देने की अनुमति नहीं देते हैं।
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तुर्कमेनिस्तान के इस तर्क ने इस परियोजना को लेकर जारी बातचीत पर विराम लगा दिया है और इस पाइपलाइन को बनाने के लिए आगे आने वाली विदेशी कंपनियों की संख्या भी सीमित हो गई है। हाल में तुर्कमेनिस्तान में भारत के राजदूत ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को यह संदेश दिया है। राजदूत ने पेट्रोलियम मंत्रालय को बताया है कि तुर्कमेनिस्तान ने किसी विदेशी कंपनी के साथ प्रोडक्शन शेयरिंग कांट्रैक्ट करने से इनकार किया है।
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तुर्कमेनिस्तान ने सिर्फ एक संभावना की ओर संकेत किया है कि वे चारों प्रतिभागी देशों की राष्ट्रीय तेल कंपनियों के कंसोर्शियम के साथ कांटैक्ट करने पर विचार करने को तैयार हैं। इसमें तुर्कमेनिस्तान की राष्ट्रीय तेल कंपनी तुर्कमेनगेज कंसोर्शियम लीडर होगी। हालांकि इस बात की संभावना बेहद कम है कि यह सुझाव काम करेगा, क्योंकि गेल की राय है कि तापी पाइपलाइन में जटिल भूराजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। ऐसे में पाइपलाइन बनाना और इसे अगले तीस वर्ष तक चलाने का काम बेहद चुनौतीपूर्ण है।
चारों तापी कंपनियों के पास इस तरह की विशेषज्ञता नहीं है और पाइपलाइन को बराबर हिस्सेदारी वाली या तुर्कमेनगेज की अगुवाई में कंसोर्शियम द्वारा तैयार किया जाना व्यावहारिक तौर पर संभव नहीं है। इस बीच खबर है कि अमेरिका भी इस पाइपलाइन परियोजना में अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए मैदान में उतर चुका है और अमेरिका का दावा है कि अगर तुर्कमेनिस्तान सरकार अपने तटीय क्षेत्र को विदेशी कंपनी के लिए खोलती है तो अमेरिकी कंपनी को पाइपलाइन बनानी चाहिए। अमेरिका सरकार शायद चीन को मात देने का प्रयास कर रही है।
चीन ने तुर्कमेनिस्तान के साथ गैस आपूर्ति समझौता करके बढ़त बना ली है। अमेरिकी सरकार ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और भारत को अमेरिकी कंपनी की परियोजना में दिलचस्पी के बारे में जानकारी दे दी है। अमेरिका इन तीन देशों को तुर्कमेनिस्तान को राजी करने के लिए अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहा है।