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अखिलेश यादव सरकार को महंगा पड़ेगा गन्ने का पंगा?

Thu, 06 Mar 2014 07:49 AM IST
Updated Thu, 06 Mar 2014 07:49 AM IST
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akhilesh yadav government will really mess up the cane?

लोक सभा में सबसे ज्यादा 80 सांसद भेजने वाले राज्य उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार के लिए गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर बकाया एक बड़े राजनीतिक खामियाजे का कारण बन सकता है। चालू पेराई सीजन (2013-14) के लिए तीन मार्च तक राज्य की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया 9,544.33 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

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चौंकाने वाली बात यह कि राज्य की दो चीनी मिलों ने 3 मार्च तक गन्ना किसानों को एक पैसे का भी भुगतान नहीं किया है जबकि दो निजी चीनी मिलों ने दो फीसदी तक ही भुगतान  किया है। बुधवार को 16वीं लोकसभा के लिए चुनाव आयोग ने चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया और उत्तर प्रदेश में 10 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होगा। ऐसे में गन्ना मूल्य का रिकार्ड बकाया किसानों को नाराजगी का सबसे बड़े चुनावी मुद्दे में तब्दील हो सकता है।

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किसानों की नाराजगी, क्या भारी पड़ेगी?

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इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक अबिनाश वर्मा ने अमर उजाला को बताया कि चीनी के कमजोर दामों के चलते मिलों के पास गन्ना मूल्य के भुगतान की क्षमता ही नहीं है। मार्च के अंत तक गन्ना मूल्य बकाया सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाएगा।

उद्योग सूत्रों के मुताबिक ऐसे में अप्रैल से शुरू हो रहे लोक सभा चुनावों में सरकार द्वारा किसानों की नाराजगी दूर करने का कोई उपाय नहीं दिख रहा है। उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग द्वारा तैयार आंकड़ों के मुताबिक चालू पेराई सीजन में 3 मार्च, 2014 तक किसानों ने चीनी मिलों को 13,533.41 करोड़ रुपये के गन्ने की आपूर्ति की।

इसमें से 3,989.48 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। यानी 9,544.33 करोड़ का भुगतान होना है। यह बकाया राज्य सरकार द्वारा चालू साल के लिए तय 280 रुपये प्रति क्विंटल के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) के आधार पर है।

अखिलेश सरकार के लिए नई मुसीबत?

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राज्य सरकार ने चालू सीजन के लिए चीनी मिलों को 20 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान सीजन के अंत में करने की छूट दे रखी है। वहीं कानूनी रूप से बकाया का आकलन करने के लिए गन्ना आपूर्ति के 14 दिन बाद की राशि का आकलन किया जाता है। इस आधार पर 3 मार्च तक 10,557.47 करोड़ रुपये का भुगतान होना था।

अभी तक के भुगतान के बाद 6,567.99 करोड़ रुपये बकाया बनता है जो कुल भुगतान योग्य राशि का 37.79 फीसदी है। इसमें 6,119.73 करोड़ रुपये निजी चीनी मिलों पर बकाया है। निगम की एक मात्र चीनी मिल ने 81.72 फीसदी और सहकारी चीनी मिलों ने 60.59 फीसदी मूल्य का भुगतान कर दिया है।

निजी चीनी मिलों में यूके मोदी समूह की मलकपुर और मोदीनगर स्थित चीनी मिलों ने 276.26 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा है लेकिन किसानों को 3 मार्च तक कोई भुगतान नहीं किया है। वहीं तितावी और मवाना चीनी मिल ने 1.56 फीसदी और 1.26 फीसदी पैसा ही किसानों को दिया है। नगलामल चीनी मिल ने भी 2.16 फीसदी राशि का ही भुगतान किया है।

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