फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   air india may join low fare bandwagon to attract air travellers

सस्ते किराये की होड़ में शामिल हो सकती है एयर इंडिया

Wed, 20 Feb 2013 06:18 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Wed, 20 Feb 2013 06:18 PM IST
विज्ञापन
air india may join low fare bandwagon to attract air travellers

विमानन कंपनी जेट एयरवेज द्वारा सस्ते हवाई किराये की महासेल लगाए जाने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया ने भी संकेत दिया कि वह हवाई यात्रियों को आकर्षित करने के लिए किराए में कमी करने की होड़ में शामिल हो सकती है।

विज्ञापन


जेट एयरवेज ने साल के अंत तक 2,250 रुपये में 20 लाख सीटें उपलब्ध कराने की पेशकश की है। हालांकि, सरकार को इस बात की उम्मीद नहीं थी कि किराए में कमी विमानन नियामक डीजीसीए द्वारा तय न्यूनतम किराया स्तर से भी नीचे चला जाएगा।
विज्ञापन


एयर इंडिया के सीएमडी रोहित नंदन ने कहा कि हम बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। एयर इंडिया इस संबंध में कोई भी कदम बाजार की स्थिति को देखकर ही उठाएगी। जेट की सस्ते हवाई टिकटों की घोषणा के बाद बजट एयरलाइंस स्पाइसजेट, गो एयर और इंडिगो भी चयनित रूटों पर किराया घटाने की होड़ में शामिल हो गई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह पूछ जाने पर कि क्या गलाकाट प्रतिस्पर्धा से भारत में पहले से वित्तीय संकट से घिरी कंपनियों की कठिनाई और नहीं बढ़ेगी, नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने कहा कि हम हवाई किराए का नियमन नहीं करते। हम एक प्रकोष्ठ बना रहे, जो किराया दरों की निगरानी करेगा। लेकिन, निगरानी किराए के नियमन से अलग है।

जेट की इस पहल पर एयरलाइंस इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि यह पहल जेट-एतिहाद सौदे से ध्यान हटाने की कोशिश हो सकती है। क्योंकि, उस सौदे में कुछ दिक्कतें हो गई हैं। इसके साथ ही किराए में कमी का उद्देश्य पिछले कुछ दिनों में कंपनी के लुढ़के शेयर में तेजी लाना भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि जेट एयरवेज इस पहल के जरिए अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के यात्रियों को आकर्षित करने और करीब 400 करोड़ रुपये की नकदी जुटाना चाहता है।


गौरतलब है कि पिछले माह स्पाइसजेट द्वारा सस्ते किराये की पेशकश करने के बाद डीजीसीए ने अन्य दूसरी विमानन कंपनियों से कहा था कि उन्हें इस होड़ में शामिल नहीं होना चाहिए। इस तरह पहल उनकी वित्तीय स्थिति के लिए नुकसानदायक हो सकती है। घरेलू विमानन उद्योग पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed