हकीकत: जानबूझ कर लेट होते हैं एयर इंडिया के विमान
एयर इंडिया में सिर्फ छोटे स्तर पर ही कर्मचारी लापरवाह हैं, ऐसी बात नहीं है। प्रबंधन स्तर पर भी लापरवाही का यही आलम है। तभी तो इसके पास 3,200 केबिन क्रू की भारी भरकम फौज है, तब भी यह करीब 800 क्रू की और भर्ती करने की फिराक में है।
ऐसी बात नहीं है कि एयर इंडिया के पास क्रू की वास्तव में कमी है। कमी है तो बस सही ढंग से प्रबंधन की। एयर इंडिया के बेड़े में इस समय कुल 99 विमान हैं, जिनमें से रखरखाव और कुछ अन्य वजह से 21 विमान हमेशा जमीन पर ही रहते हैं। मतलब कंपनी के पास उड़ान के लिए 78 विमान उपलब्ध रहते हैं।
इसके पास इस समय केबिन क्रू श्रेणी में कुल 3,200 कर्मचारी हैं, मतलब प्रति विमान 41 से भी ज्यादा क्रू। उड़ान के वक्त एक विमान में 4 से 13 तक केबिन क्रू को तैनात करना पड़ता है, लेकिन प्रबंधन ऐसा लचर और ढीलाढाला है कि केबिन क्रू समय पर नहीं पहुंचते।
औसत फ्लाइंग आवर सबसे कम
कंपनी के एक आधिकारी के मुताबिक विमानन उद्योग में देखें तो एयर इंडिया के क्रू का औसत फ्लाइंग आवर सबसे कम है। मतबल उनका सही ढंग से उपयोग ही नहीं हो पा रहा है।
नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) के नियमों के मुताबिक क्रू का कोई सदस्य साल में अधिकतम 1000 घंटे तक विमान में काम कर सकता है, मतलब महीने में 83-84 घंटे।
लेकिन एयर इंडिया में क्रू का औसत फ्लाइंग आवर महज 55 घंटे बैठता है। तब पर भी यहां पिछले छह महीने से केबिन क्रू की नई भर्ती के लिए लगातार कवायद चल रही है।
जानबूझ कर लेट कराए जा रहे विमान
कंपनी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय से लेकर एयर इंडिया तक के वरिष्ठ अधिकारी नई भर्ती में काफी रुचि ले रहे हैं।
इसलिए जानबूझ कर क्रू की वजह से उड़ान लेट कराया जा रहा है, ताकि हंगामा हो और बाहर इस तरह का संदेश जाए कि कर्मचारियों की संख्या कम है। कंपनी के अधिकारियों की वजह से आज तक एयर इंडिया में सही तरीके से ड्यूटी रोस्टर नहीं बन पा रहा है।
कुछ क्रू के जरूरी कागजाग जानबूझ कर गुम कर उन्हें ग्राउंडेड कर दिया जाता है। अधिकारियों की शह पर क्रू अपनी पसंद की फ्लाइट की मांग करते हैं और ऐसा नहीं होने पर ड्यूटी करने से मना कर देते हैं। जिस कंपनी की हालत ऐसी हो वहां क्रू का कृत्रिम अभाव तो होना ही है।