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इस साल पटरी पर लौटेगी अर्थव्यवस्था: प्रणब
Market
Updated Tue, 12 Jun 2012 12:00 PM IST
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देश की आर्थिक विकास दर 6.5 फीसदी से नीचे लुढ़कने की आशंकाओं को दरकिनार करते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि 2012-13 का साल देश की अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव लाने वाला साबित होगा।
आयकर अधिकारियों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था को ऊंची विकास दर की ओर ले जाने के लिए सरकार की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं। इनका असर दिखने में स्वाभाविक रूप से कुछ समय लगेगा, पर उम्मीद है कि इसी साल से हमें आर्थिक हालात में बदलाव होते नजर आने लगेंगे।
वित्त वर्ष 2011-12 में जीडीपी की विकास दर नौ साल के सबसे निचले स्तर 6.5 फीसदी पर आने को लेकर निराशा की ओर इशारा करते हुए मुखर्जी ने कहा कि 2008 के आर्थिक संकट के बाद भी देश की विकास दर गिरकर 6.7 फीसदी पर आ गई थी, पर इसके अगले दो सालों के दौरान यह दोबारा 8.4 फीसदी की ऊंचाई पर देखी गई।
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ऐसा ही आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा क्योंकि ब्याज दरें फिर से घटनी शुरू हो गई हैं, खनन क्षेत्र में तेजी आ रही है और इस साल मानसून भी सामान्य रहने का अनुमान है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट आ रही है। इस सबका सकारात्मक प्रभाव हमें आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा।
वित्त मंत्री ने चालू वित्त वर्ष में 5.70 लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष कर वसूली के लक्ष्य को भी हासिल कर लेने की उम्मीद जताई। मुखर्जी ने कहा कि प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) विधेयक को आगामी मानसून सत्र में संसद में पेश कर दिया जाएगा और उम्मीद है कि नया कानून कहा 1 अप्रैल 2013 से प्रभाव में आ जाएगा।
उन्होंने कहा कि बेनामी लेनदेन (निवारण) अधिनियम 2011 की भी संसदीय समिति द्वारा समीक्षा की जा रही है। इससे भविष्य में काले धन की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।
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आयकर अधिकारियों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था को ऊंची विकास दर की ओर ले जाने के लिए सरकार की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं। इनका असर दिखने में स्वाभाविक रूप से कुछ समय लगेगा, पर उम्मीद है कि इसी साल से हमें आर्थिक हालात में बदलाव होते नजर आने लगेंगे।
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वित्त वर्ष 2011-12 में जीडीपी की विकास दर नौ साल के सबसे निचले स्तर 6.5 फीसदी पर आने को लेकर निराशा की ओर इशारा करते हुए मुखर्जी ने कहा कि 2008 के आर्थिक संकट के बाद भी देश की विकास दर गिरकर 6.7 फीसदी पर आ गई थी, पर इसके अगले दो सालों के दौरान यह दोबारा 8.4 फीसदी की ऊंचाई पर देखी गई।
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ऐसा ही आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा क्योंकि ब्याज दरें फिर से घटनी शुरू हो गई हैं, खनन क्षेत्र में तेजी आ रही है और इस साल मानसून भी सामान्य रहने का अनुमान है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट आ रही है। इस सबका सकारात्मक प्रभाव हमें आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा।
वित्त मंत्री ने चालू वित्त वर्ष में 5.70 लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष कर वसूली के लक्ष्य को भी हासिल कर लेने की उम्मीद जताई। मुखर्जी ने कहा कि प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) विधेयक को आगामी मानसून सत्र में संसद में पेश कर दिया जाएगा और उम्मीद है कि नया कानून कहा 1 अप्रैल 2013 से प्रभाव में आ जाएगा।
उन्होंने कहा कि बेनामी लेनदेन (निवारण) अधिनियम 2011 की भी संसदीय समिति द्वारा समीक्षा की जा रही है। इससे भविष्य में काले धन की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।