...और मोक्ष पाने के लिए उठा लिया ये कदम
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लोग मोक्ष पाने के लिए जिंदगी में कई अच्छे काम और दान करते हैं। लेकिन क्या आपने किसी को मोक्ष पाने के लिए मरते देखा है। काशी के के दशाश्वमेध स्थित एक धर्मशाला में चेन्नई की दो महिलाओँ ने आत्महत्या कर ली। कमरे से मिले सुसाइड नोट में लिखा था कि मोक्ष के लिए वे काशी में प्राण त्याग रही हैं। कमरे से तंत्र विद्या से जुड़ी कुछ किताबें और एक लाख 17 हजार रुपये भी मिले। रुपये के बारे में लिखा था कि उनका अंतिम संस्कार विधि विधान से किया जाए। परंपरानुसार लोगों को खाना भी खिलाया जाए। घटना की सूचना मिलने पर एसपी सिटी संतोष सिंह मौके पर पहुंचे थे।
डॉक्टर और इतना अंधविश्वास
चेन्नई के पेरमबुर की रहने वाली चंद्रा (62) पेशे से डॉक्टर थीं। परिवार में उनके अलावा केवल बेटी उषा नंथिनी (32) ही थी। चंद्रा के पति कूर सेनामूर्ति का पूर्व में देहांत हो चुका है। मां और बेटी दस दिसंबर को दशाश्वमेध पहुंचीं और एक धर्मशाला के कमरा नंबर 11 में ठहरी थीं। दिन में दोनों कहीं चली जाती और रात में लौटती थीं। एक सुबह जब दोनों काफी देर तक कमरे से नहीं निकलीं तो कर्मचारियों को संदेह हुआ। उन्होंने दरवाजा खोलकर देखा तो अवाक रह गए। चंद्रा फंदे से लटक रही थी, जबकि उषा बिस्तर पर पड़ी थी। दरवाजा अंदर से लॉक नहीं था।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने फंदे से शव को नीचे उतारा। चंद्रा ने तमिल भाषा में सुसाइड नोट में लिखा था कि पति की मौत के बाद वह बेटी के साथ अकेली रह रही थी। अपने जीवन से वह निराश थी। सुना था कि काशी में मरने से मोक्ष प्राप्त होता है। इसी वजह से वह बेटी संग काशी में प्राण त्याग रही है। उसने यह भी लिखा था कि अंतिम संस्कार समेत अन्य कार्यक्रमों के लिए वह एक लाख 41 हजार छह सौ रुपये छोड़कर जा रही है। हालांकि पुलिस को एक लाख 17 हजार रुपये ही मिले। दशाश्वमेध थाना प्रभारी आरबी सिंह के अनुसार शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं।
पहले बेटी को मारा फिर फंदे से झूल गई
वाराणसी। चंद्रा अपनी बेटी के साथ एक ही कमरे में ठहरी थी। उसका शव फंदे से लटक रहा था तो उषा तकिया लगाकर शॉल ओढ़कर आराम से सोई थी। मुंह और नाक से खून निकलता देख उसके विषाक्त खाने की आशंका है। पास में ही मिर्गी से जुड़ीं दवाइयां बिखरी थीं। पुलिस का अनुमान है कि चंद्रा ने पहले बेटी को विषाक्त देकर मारा और फिर खुद फंदे से लटक गई।