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जिंदगी ने इतना सताया, गुफा में रहना इनको भाया
उदयपुर।
Updated Tue, 06 Nov 2012 12:36 PM IST
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जिंदगी एक जंग है और हर एक पल इम्तिहान लेता है। लेकिन जिंदगी में मिले कष्टों से यह बुजुर्ग महिला इतनी दुखी हो गई कि सांसारिक मोह माया का त्याग कर दिया। अब जीवन में उन्हें किसी चीज की परवाह नहीं है। गुफा के अंदर ही जीवन गुजर बसर कर रही है।
स्पीति घाटी के शिचलिंग गांव से करीब 12 किलोमीटर दूर लुडुपदीन गंगछुमिक गुफा में पिन वैली के मुद गांव की टी छोमो पिछले 23 साल से तपस्या में लीन है। तीन दशक पूर्व इस महिला के पति और दो जवान बेटों की मौत हो गई थी। इसके बाद घरबार छोड़कर टी छोमों ने हाड़ मांस कंपा देने वाली सर्दी में भी घर का रुख नहीं किया।
काजा के तकपा बौद्ध, डंखर के दोरजे छेरिंग और लालुंग के टशी छेरिंग बताते हैं कि ग्रामीण ही गुफा तक उसे राशन छोड़ आते हैं। तकपा बौद्ध ने बताया कि तपस्या में लीन टी छोमों की आंखें जरूर कमजोर पड़ गईं हैं लेकिन अभी चल फिर सकती है।
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स्पीति घाटी के शिचलिंग गांव से करीब 12 किलोमीटर दूर लुडुपदीन गंगछुमिक गुफा में पिन वैली के मुद गांव की टी छोमो पिछले 23 साल से तपस्या में लीन है। तीन दशक पूर्व इस महिला के पति और दो जवान बेटों की मौत हो गई थी। इसके बाद घरबार छोड़कर टी छोमों ने हाड़ मांस कंपा देने वाली सर्दी में भी घर का रुख नहीं किया।
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काजा के तकपा बौद्ध, डंखर के दोरजे छेरिंग और लालुंग के टशी छेरिंग बताते हैं कि ग्रामीण ही गुफा तक उसे राशन छोड़ आते हैं। तकपा बौद्ध ने बताया कि तपस्या में लीन टी छोमों की आंखें जरूर कमजोर पड़ गईं हैं लेकिन अभी चल फिर सकती है।
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