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स्टेशन पर कुलीगिरी क्यों कर रही है विधवा

Sat, 29 Dec 2012 12:11 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क। Updated Sat, 29 Dec 2012 12:11 PM IST
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widow forced to carry luggage on station for a living

सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं....। फिल्म 'कुली' में अमिताभ बच्चन पर फिल्माया गया ये गीत लुधियाना की 40 वर्षीय विधवा पर सटीक बैठता है। पंजाब के लुधियाना जिले के रेलवे स्टेशन पर मुसाफिरों का भारी सामान कंधों और सिर पर लादकर फिरकनी की तरह दौड़ती माया को देखकर नहीं लगता है कि वो किसी मर्द कुली से कमतर है। इस महिला कुली को सामान उठाते देखकर आस पास के लोग चौंक उठते हैं। लेकिन आस पास के लोग जानते हैं कि माया ये बोझ क्यों उठा रही है।

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शौक से नहीं बनी कुली
माया को कुली बनने का शौक नहीं था। कुछ समय पहले पति की मौत के बाद घर और बच्चे को पालने की जिम्मेदारी माया पर आ गई। माया के पति भी लाइसेंसधारी कुली थे और उनकी मौत के बाद माया ने इसी पेशे को अपनाने की सोची।
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माया का कहना है कि उसका 12 साल का बेटा है जो पढ़ना चाहता है। उसकी पढ़ाई को जारी रखने और उसे जिंदगी में किसी मुकाम पर लाने की खातिर ही मैंने शारीरिक रूप से कठिन इस पेशे को चुना। मेरे पास कोई विकल्प नहीं था।
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दुनिया ने खूब सताया
माया के अनुसार पहले तो लोगों ने उस पर ताने कसे और हतोत्साहित किया। स्टेशन पर भी पैसेंजर ये कहते हुए सामान देने से कतराते थे कि 'औरत हो, उठा नहीं पाओगी। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और प्रयास करती रही। आजकल वो रोज करीब 20 25 लोगों का सामान स्टेशन से बाहर और बाहर से गाड़ी तक रखती है। इसके लिए उसे ठीक ठाक पैसे मिल जाते हैं।

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