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बड़ी रहस्यमयी है ये स्याही, कैसे बनती है किसी को पता नहीं

शिमला/इंटरनेट डेस्क। Updated Fri, 12 Oct 2012 03:19 PM IST
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voting ink how to make nobody knows

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देश में सरकार चुनने के लिए समय समय पर चुनाव होते हैं और एक जिम्मेदार नागरिक की तरह हम वोट डाल कर आते हैं। वोट डालने के बाद अधिकारी हमारे नाखून पर एक काली स्याही से निशान लगाता है। खास बात ये है कि लाख साफ करने के बाद उस समय ये स्याही नाखून से नहीं छूटती। यही तो कमाल है इस स्याही का, जो मैसूर के महाराजा नारवाड़ी को भा गया था।
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चुनाव के दौरान फर्जी मतदान रोकने में कारगर औजार के प में प्रयुक्त हाथ की उंगली के नाखून पर लगाई जाने वाली स्याही सबसे पहले मैसूर के महाराजा नालवाडी कृष्णराज वाडियार द्वारा वर्ष 1937 में स्थापित मैसूर लैक एंड पेंट्स लिमिटेड कंपनी ने बनायी थी।


वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद मैसूर लैक एंड पेंट्स लिमिटेड सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बन गई। अब इस कंपनी को मैसूर पेंट्स एंड वार्निश लिमिटेड के नाम से जाता है। कर्नाटक सरकार की यह कंपनी अब भी देश में होने वाले प्रत्येक चुनाव के लिए स्याही बनाने का काम करती है और इसका निर्यात भी करती है। चुनाव के दौरान मतदाताओं को लगाई जाने वाली स्याही निर्माण के लिए इस कंपनी का चयन वर्ष 1962 में किया गया था और पहली बार इसका इस्तेमाल देश के तीसरे आम चुनाव किया गया था।

इस स्याही को बनाने की निर्माण प्रक्रिया गोपनीय रखी जाती है और इसे 'नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी आफ इंडिया' के रासायनिक फार्मूले का इस्तेमाल करके तैयार किया जाता है। यह आम स्याही की तरह नहीं होती और उंगली पर लगने के 60 सेकंड के भीतर ही सूख जाती है।

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