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यहां जूते चप्पल पहन कर निकले तो मिलेगी सजा

Thu, 20 Sep 2012 04:48 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Thu, 20 Sep 2012 04:48 PM IST
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village where people do not wear shoes
आप अपने बच्चों को जूते-चप्पल पहनना सिखाते होंगे लेकिन एक गांव ऐसा है जहां बच्चों यह सिखाया जाता है कि जूते-चप्पल नहीं पहनना चाहिए। इसे पढ़कर आप शायद हैरान हो रहे होंगे। लेकिन यह सच है। म से लगभग 20 किलोमीटर दूर एक गांव है 'कलिमायन'। इस गांव के लोग न तो खुद जूते-चप्पल पहनते हैं और न बच्चों को पहनने की इजाजत देते हैं। अगर कोई गलती से जूते या चप्पल पहन ले तो उसे सजा सुनाई जाती है।
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यहां तक कि अगर बाहरी व्यक्ति इस गांव में जूते चप्पल पहनकर आता है तो उसे भी हिदायत दी जाती है कि अपने जूते चप्पल उतारकर हाथ में रख लें। इसलिए जूते-चप्पल पहनने की है मनाही लगभग 300 परिवार वाले कलिमायन गांव के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि है। इस गांव के लोग 'अपाच्छी' नामक देवता की पूजा करते हैं।
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लोगों का मानना है कि यह देवता ही उनकी रक्षा करते हैं। लोग 'अपाच्छी' देवता के प्रति आस्था दर्शाने के लिए गांव की सीमा के अंदर जूते-चप्पल नहीं पहनते हैं। यह परंपरा कब से चली आ रही है इसका पता नहीं मगर लोगों का मानना है कि कई पीढ़ियों से इस गांव के लोग ऐसा करते चले आ रहे हैं। परंपरागत रूप से वे अपने बच्चों को भी ऐसा ही सिखाते हैं। यहां के बच्चे स्कूल भी नंगे पांव जाते हैं।
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लोगों को अगर गांव से बाहर कभी जाना होता है तो वे अपने जूते-चप्पलों को गांव की सीमा तक हाथ में लेकर जाते हैं और बाहर पहुंचकर पहनते हैं।
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