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चंबल के घड़ियालों ने दिलाई दुनिया में वाहवाही

Mon, 23 Dec 2013 12:53 PM IST
Updated Mon, 23 Dec 2013 12:53 PM IST
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udayan_photographer_wildlife

उम्र है 14 साल, शौक है जंगली जीव-जंतुओं को देखना और साथ में वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफ़ी...नाम है उदयन राव पवार। उदयन ने हाल ही में प्रतिष्ठित यंग वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफ़र अवॉर्ड जीता है।

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उनकी जिस तस्वीर को पुरस्कार मिला, वह चंबल नदी में एक मादा घड़ियाल की फोटो है, जिसके सिर पर उसके कई छोटे बच्चे खेल रहे हैं...मानो कोई मुकुट हो।

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संरक्षण की तमाम कोशिशों के बावजूद घड़ियाल लुप्त होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। बताया जा रहा है कि इस तरह के घड़ियाल महज़ कुछ सौ की संख्या में ही बचे हैं।
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दुनिया भर से चुनी गई तस्वीरों में से उदयन की यह तस्वीर वन्यजीव फ़ोटोग्राफ़ी के युवा वर्ग में सर्वश्रेष्ठ चुनी गई है। वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफ़ी अवॉर्ड दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में से है। इसे लंदन नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम और बीबीसी वाइल्डलाइफ़ मैगज़ीन आयोजित करती है।

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ग्वालियर में नौवीं क्लास में पढ़ने वाले उदयन इस तस्वीर खींचने की कहानी कुछ इस तरह बताते हैं, "मुझे वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अभियानों में काफ़ी रुचि है।

मैं शिवपुरी गया था जहाँ कुछ खंडहर हैं। मुझे बताया गया कि वहां चंबल नदी के किनारे घड़ियालों का बसेरा है। मुझे घड़ियालों के बारे में कुछ जानकारी पहले से थी। घड़ियालों की एक आदत होती है कि जब मादा घड़ियाल निकलती है, तो उसके बच्चे लाड़-प्यार में उसके सिर पर चढ़ जाते हैं। मैंने इसी लम्हे को कैमरे में क़ैद कर लिया।"

घंटों पहाड़ी के पीछे छिपकर खींची तस्वीर

हालांकि इसके लिए उदयन को थोड़ी मेहनत करनी पड़ी। उदयन बताते हैं, "मैंने शाम को मुआयना किया कि कहां से फ़ोटो खींची जा सकती है। मैं एक पहाड़ी के पीछे जाकर छिप गया।

wildlife













फिर जैसे ही सुबह हुई मैंने देखा कि एक मादा घड़ियाल निकली। उसके बच्चे उस तक तैरकर पहुँचे और फिर उसके सिर पर चढ़ गए। शायद उनके प्यार जताने का तरीका है।"

उदयन बताते हैं कि दरअसल उन्हें वाइल्डलाइफ़ संरक्षण में रुचि रही है और बचपन में मिले कैमरे से वो पक्षियों को ग़ौर से देखा-परखा करते थे जिसके बाद फ़ोटोग्राफ़ी का भी शौक हो गया।

घड़ियालों के संरक्षण को लेकर उदयन काफ़ी चिंतित हैं और उन्हें उम्मीद है कि उनकी तस्वीर को मिली लोकप्रियता के बहाने शायद घड़ियालों पर लोगों का ध्यान जाए। उनका कहना है कि लुप्त हो रहे दूसरे जानवरों की तरह घड़ियालों पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। उनके मुताबिक अवैध रेत माफ़िया घड़ियालों के लिए बड़ा ख़तरा हैं।


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फ़ोटोग्राफ़ी अवॉर्ड जीतने वाले उदयन क्या भविष्य में फ़ोटोग्राफर बनना चाहते हैं? इस पर उदयन की सोच स्पष्ट है। उनका कहना है, "मैं बड़ा होकर वन्यजीव संरक्षण में काम करना चाहता हूँ। भारत को इसकी बहुत ज़रूरत है। इसी बहाने वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफ़ी का शौक भी पूरा होता रहेगा।"

फ़िलहाल तो उदयन की तस्वीरों की काफ़ी तारीफ़ हो रही है। वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफ़ी प्रतियोगिता में प्रोफ़ेशनल और शौकिया फ़ोटोग्राफर अपनी फ़ोटो बिना पहचान ज़ाहिर किए भेजते हैं, जहाँ कलाकारी, सृजनशीलता और तकनीकी दक्षता के हिसाब से फ़ोटो चुनी जाती है।

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