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यहां, टुकड़े-टुकडे कर चील, कौओं को परोसी जाती है लाश
इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 26 Jul 2013 08:26 AM IST
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दुनियाभर में अंतिम क्रिया कर्म की कई रस्में हैं। कुछ में लोग जलाते हैं और कुछ में दफनाते हैं लेकिन तिब्बत में अंतिम क्रिया-कर्म की विधि बिल्कुल ही अलग और काफी हद तक हैरान करने वाली है।
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जहां चील, कौओं को लाश खिलाकर ही मुक्ति समझी जाती है। अमूमन लोग लाश को लोग दफनाते या जलाते इसीलिए हैं ताकि जानवर उससे छेड़छाड़ न कर सके लेकिन यहां इसका बिल्कुल उलट है।
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तिब्बत में बौद्घ संप्रदाय के लोग खुले आकाश के नीचे लाश का अंतिम संस्कार करते हैं। ये लोग लाश को छोट-छोटे टुकडो़ में काट कर आसमान के नीचे फेंक देते हैं।
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दरअसल बौद्घ संप्रदाय में शरीर को नश्वर मानते हैं और वो इसे संरक्षित करने में भरोसा नहीं करते। बल्कि उनका मानना है कि अगर ये शरीर भी किसी के काम आ सके तो उससे बेहतर कुछ भी नहीं। इसलिए वो किसी के मर जाने पर उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े करके उसे खुले आसमान में फेंक देते हैं।
करीब 80 फीसदी तिब्बती बौद्घ इसी तरह से अंतिम संस्कार करते हैं।