फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Bizarre News Archives ›   these are cause of rape

हालत न सुधरी तो ये भी करेंगे 'बलात्कार'

Mon, 06 May 2013 09:26 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 06 May 2013 09:26 PM IST
विज्ञापन
these are cause of rape

फांसी, उम्रकैद, सरेआम मार दिया जाना या किसी अपराधी को नपुंसक बना देना। क्या यही उपाय हैं जो समाज में होने वाले यौन अपराधों को रोक सकते हैं?

विज्ञापन


कहीं ऐसा तो नहीं कि कुछ और भी बातें हों जिनपर हमारा ध्यान नहीं जा रहा, जो इन अपराधों का कारण हों या इन अपराधों को कम करने में मददगार हो सकती हों।

16 दिसंबर की रात को दामिनी के साथ बलात्कार पर पूरे देश का खून खौलता है। पूरा देश उस समय सकते में आ जाता है जब उन्हें पता चलता है कि इस सामूहिक बलात्कार में एक आरोपी नाबालिग भी है।
विज्ञापन


पूरा देश बलात्कारों के मामलों पर अपना गुस्सा जाहिर करता है। लेकिन दिल्ली में ही 100 सरकारी और 150 निगम के स्कूली बच्चे नशे का शिकार हो रहे हैं, इस बात पर इतना ही रोष क्यों जाहिर नहीं होता?
विज्ञापन
विज्ञापन


हम देख रहे हैं कि नाबालिग बलात्कार कर रहे हैं लेकिन दिल्ली के उन 250 स्कलों के बच्चों को कौन देखेगा, जो स्कूल के पास शराब के ठेकों पर जाकर बोतलें तलाश रहे हैं।

ये बच्चे नशे के आदी हो रहे हैं क्योंकि स्कूल के पास के ठेकों पर जाकर बोलतों की बची शराब तलाशते हैं, सिगरेट और बीड़ी के बचे हुए टुकड़ों को सुलगाते हैं।

इन बच्चों को देखने वाला कोई नहीं है। न ही सरकार इस बात पर ध्यान दे रही है कि ऐसी जगहों पर ठेके कैसे बने हुए हैं जबकि वहां पर स्कूल हैं।

यहां तक कि हाईकोर्ट भी सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेने के निर्देश दे चुकी है। फांसी या कोई भी और सजा देना शायद आसान हो लेकिन इस तरह के मुद्दों से सरकार कैसे निपटती है यह देखना होगा।

नशा सिर्फ नाबालिक ही क्यों, सभी के लिए बुरा है। नशे की हालत में व्यक्ति की खुद पर काबू कर पाने की क्षमता कम हो जाती है। कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि नशे की हालत में व्यक्ति अधिक उग्र व्यवहार भी करता है।


चाहे दामिनी प्रकरण हो, गुड़िया या ऐसा ही कोई और भयावह अपराध देखा जाए तो ज्यादातर अपराधों में अपराधी नशे में होता है। ऐसी परिस्थिति में हम इस बात को कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं कि नशे की समस्या से कैसे उपजा जाए।

सजा का प्रावधान उचित है लेकिन ऐसी और भी बहुत सी बाते हैं जिन पर हमें ध्यान देना होगा। समाज को मानसिक और शारिरिक रूप से स्वस्थ बनाने के लिए किसी भी परिस्थिति में सिर्फ सजा पर्याप्त नहीं हो सकती।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed