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चौंकिए मत, 'मस्तिष्क' खाया करते थे हमारे पूर्वज
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
Updated Mon, 06 May 2013 11:30 AM IST
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हाल ही में हुई एक वैज्ञानिक खोज से यह पता चला है कि मनुष्य के पूर्वज अपने भोजन के रूप में मनुष्य एवं जानवरों का मस्तिष्क भी खाया करते थे।
केन्या में मिले प्रमाणों के अनुसार वैज्ञानिकों को यह जानने को मिला कि प्राचीन मनुष्य के भोजन में हिरण और बारहसिंघा के मस्तिष्क का मांस भी शामिल था।
वैज्ञानिको को यह भी पता चला कि उस समय के मनुष्य अपने शिकार को खाने से पहले उसके बारीक हिस्से भी किया करते थे।
न्यूजर डॉट कॉम के अनुसार केन्या के इस हिस्से में जानवरों की कई अजीबो-गरीब आकार की खोपड़ियां मिली हैं।
जानवरों की इन खोपड़यों के भीतर इस तरह के निशान प्राप्त हुए हैं जिससे यह पता चलता है कि मनुष्य पहले पत्थर और कई नुकीली चीजों से मस्तिष्क के भीतर के रस और मांस को भोजन के रूप में ग्रहण करते थे।
एक अध्ययन के अनुसार यह पता चला है कि मस्तिष्क का मांस और न्यूट्रीशियन से भरी कोशिकाएं उनके बड़े शरीर, दिमाग और लंबी दूरियों को पार करने की जरूरतों को पूरा करते थे।
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केन्या में मिले प्रमाणों के अनुसार वैज्ञानिकों को यह जानने को मिला कि प्राचीन मनुष्य के भोजन में हिरण और बारहसिंघा के मस्तिष्क का मांस भी शामिल था।
वैज्ञानिको को यह भी पता चला कि उस समय के मनुष्य अपने शिकार को खाने से पहले उसके बारीक हिस्से भी किया करते थे।
न्यूजर डॉट कॉम के अनुसार केन्या के इस हिस्से में जानवरों की कई अजीबो-गरीब आकार की खोपड़ियां मिली हैं।
जानवरों की इन खोपड़यों के भीतर इस तरह के निशान प्राप्त हुए हैं जिससे यह पता चलता है कि मनुष्य पहले पत्थर और कई नुकीली चीजों से मस्तिष्क के भीतर के रस और मांस को भोजन के रूप में ग्रहण करते थे।
एक अध्ययन के अनुसार यह पता चला है कि मस्तिष्क का मांस और न्यूट्रीशियन से भरी कोशिकाएं उनके बड़े शरीर, दिमाग और लंबी दूरियों को पार करने की जरूरतों को पूरा करते थे।
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