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जागते रहो वरना लगेगा इन महाशय का थप्पड़...
नई दिल्ली
Updated Fri, 21 Sep 2012 12:39 PM IST
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अगर आपके वॉचमैन या हाउस कीपर को ड्यूटी पर सोने की आदत है तो उसे यह खबर जरूर सुनाएं। खबर सुनते ही वाचमैन की यह आदत छूट जाएगी। कोटा के नजदीक एक पैलेस में ड्यूटी पर सोने वाले वॉचमैन और हाउस कीपर को जोरदार थप्पड़ पड़ता है।
हो सकता है कि आप इस पर यकीन न करें लेकिन खबर सोलह आने सच है। यह किसी और देश की बात भी नहीं है बल्कि अपने ही देश के राजस्थान के कोटा शहर की बात है।
कोटा में रेलवे स्टेशन से तीन किलोमीटर और एयरपोर्ट से 5 किलोमीटर की दूरी पर बसा है बृजराज भवन पैलेस। वर्तमान में यह एक हैरिटेज होटल है। इस होटल के कर्मचारी एवं कई पर्यटकों ने अनुभव किया है कि इस होटल में एक ब्रिटिश मेजर की आत्मा भटकती है। यह आत्मा किसी को नुकसान नहीं पहुंचाती बल्कि पैलेस की निगरानी करती है।
इस मेजर की आत्मा को सिर्फ एक चीज बुरी लगती है वह है ड्यूटी के समय वॉचमैन और हाउस कीपर का सोना। बृजराज भवन पैलेस में भटकती हुई आत्मा जब भी इन्हें ड्यूटी पर सोते अथवा स्मोकिंग करते हुए देखती है एक जोरदार थप्पड़ लगाती है।
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ऐसी मान्यता है कि 1857 में सिपाही विद्रोह के समय इस पैलेस में एक ब्रिटिश रेजिडेंट मेजर चार्ल्स बुर्टन रहता था। विद्राहियों ने इस पैलेस पर आक्रमण कर दिया। चार्ल्स बुर्टन के दो बेटे भी इस समय उसके साथ थे। कुछ सैनिकों के साथ इन तीनों ने काफी समय तक विद्रोहियों का मुकाबला किया लेकिन विद्रोहियों ने इन्हें पराजित कर दिया।
चार्ल्स बुर्टन विद्रोहियों के हाथों मारा गया। इस समय से ही ब्रिटिश रेजिडेंट मेजर चार्ल्स बुर्टन की आत्मा इस पैलेस में भटक रही है। बृजराज भवन पैलेस के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने मेजर भी आवाज सुनी है।
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हो सकता है कि आप इस पर यकीन न करें लेकिन खबर सोलह आने सच है। यह किसी और देश की बात भी नहीं है बल्कि अपने ही देश के राजस्थान के कोटा शहर की बात है।
कोटा में रेलवे स्टेशन से तीन किलोमीटर और एयरपोर्ट से 5 किलोमीटर की दूरी पर बसा है बृजराज भवन पैलेस। वर्तमान में यह एक हैरिटेज होटल है। इस होटल के कर्मचारी एवं कई पर्यटकों ने अनुभव किया है कि इस होटल में एक ब्रिटिश मेजर की आत्मा भटकती है। यह आत्मा किसी को नुकसान नहीं पहुंचाती बल्कि पैलेस की निगरानी करती है।
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इस मेजर की आत्मा को सिर्फ एक चीज बुरी लगती है वह है ड्यूटी के समय वॉचमैन और हाउस कीपर का सोना। बृजराज भवन पैलेस में भटकती हुई आत्मा जब भी इन्हें ड्यूटी पर सोते अथवा स्मोकिंग करते हुए देखती है एक जोरदार थप्पड़ लगाती है।
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ऐसी मान्यता है कि 1857 में सिपाही विद्रोह के समय इस पैलेस में एक ब्रिटिश रेजिडेंट मेजर चार्ल्स बुर्टन रहता था। विद्राहियों ने इस पैलेस पर आक्रमण कर दिया। चार्ल्स बुर्टन के दो बेटे भी इस समय उसके साथ थे। कुछ सैनिकों के साथ इन तीनों ने काफी समय तक विद्रोहियों का मुकाबला किया लेकिन विद्रोहियों ने इन्हें पराजित कर दिया।
चार्ल्स बुर्टन विद्रोहियों के हाथों मारा गया। इस समय से ही ब्रिटिश रेजिडेंट मेजर चार्ल्स बुर्टन की आत्मा इस पैलेस में भटक रही है। बृजराज भवन पैलेस के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने मेजर भी आवाज सुनी है।