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...और बेटी को साथ ले दौड़ पड़ा कैंसर का मरीज
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
Updated Wed, 20 Mar 2013 11:30 AM IST
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कैंसर से जूझ रहे टेक्सास के इराम लियोन ने गुशर मैराथन को जीत कर दिखा दिया है कि हौंसला हो तो ताकत आ ही जाती है। इराम ने 26 मील लंबी मैराथन में अपनी बेटी के साथ हिस्सा लिया। उसने पूरी रेस अपनी छह साल की बेटी को स्ट्रालर पर बिठा कर दौड़ा।
ऑस्टिन में रहने वाले 32 वर्षीय इराम को दो साल पहले ही ब्रेन कैंसर का पता चला। डॉक्टरों का कहना है कि बीमारी दूसरी स्टेज में है और वो आठ साल और जीवित रह सकता है। बीमारी के चलते इराम कार नहीं चला सकता है और किसी खेल में हिस्सा नहीं ले सकता। लेकिन वो दौड सकता है। इराम अपनी बेटी का सिंगल पेरेंट है और अपनी बेटी से बहुत प्यार करता है।
इराम का कहना है कि डॉक्टरों की देखरेख में ही उसने रेस में हिस्सा लिया। जहां तक बेटी के साथ रेस पूरी करने की बात है इराम ने कहा कि वो अपनी जिंदगी का हर एक पल अपनी बेटी के साथ बिताना चाहता है और इसीलिए पूरी रेस उसने बेटी के साथ ही पूरी की। मैराथन के आयोजकों ने इराम की बीमारी और उसके जज्बे को देखते हुए रेस में स्ट्रालर के प्रयोग की अनुमति दे दी।
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इससे पहले भी भयंकर बीमारियों से जूझने के बावजूद कुछ हिम्मती लोगों ने मैराथन में हिस्सा लेकर मिसाल पैदा की है। मई 2012 में लकवे से पीड़ित ब्रिटेन की एक महिला ने लंदन मैराथन पूरी की थी। हाल ही में ह्रदय रोग से पीड़ित 61 साल की महिला ने रायपुर में 10 किलोमीटर की मैराथन में मैडल जीता था। ऐसे में जब हार्ट पेशेंट एक किलोमीटर चलने में कतराते हैं, इस महिला ने न केवल रेस पूरी की बल्कि पदक भी जीता।
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ऑस्टिन में रहने वाले 32 वर्षीय इराम को दो साल पहले ही ब्रेन कैंसर का पता चला। डॉक्टरों का कहना है कि बीमारी दूसरी स्टेज में है और वो आठ साल और जीवित रह सकता है। बीमारी के चलते इराम कार नहीं चला सकता है और किसी खेल में हिस्सा नहीं ले सकता। लेकिन वो दौड सकता है। इराम अपनी बेटी का सिंगल पेरेंट है और अपनी बेटी से बहुत प्यार करता है।
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इराम का कहना है कि डॉक्टरों की देखरेख में ही उसने रेस में हिस्सा लिया। जहां तक बेटी के साथ रेस पूरी करने की बात है इराम ने कहा कि वो अपनी जिंदगी का हर एक पल अपनी बेटी के साथ बिताना चाहता है और इसीलिए पूरी रेस उसने बेटी के साथ ही पूरी की। मैराथन के आयोजकों ने इराम की बीमारी और उसके जज्बे को देखते हुए रेस में स्ट्रालर के प्रयोग की अनुमति दे दी।
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इससे पहले भी भयंकर बीमारियों से जूझने के बावजूद कुछ हिम्मती लोगों ने मैराथन में हिस्सा लेकर मिसाल पैदा की है। मई 2012 में लकवे से पीड़ित ब्रिटेन की एक महिला ने लंदन मैराथन पूरी की थी। हाल ही में ह्रदय रोग से पीड़ित 61 साल की महिला ने रायपुर में 10 किलोमीटर की मैराथन में मैडल जीता था। ऐसे में जब हार्ट पेशेंट एक किलोमीटर चलने में कतराते हैं, इस महिला ने न केवल रेस पूरी की बल्कि पदक भी जीता।