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जब 'जीवनदायनी' बन गई जानलेवा शार्क
नई दिल्ली
Updated Wed, 19 Sep 2012 01:50 PM IST
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प्रशांत सागर के पानी में 15 हफ्ते तक अपनी नौका में बहते रहे एक पुलिस अधिकारी को असाधारण घटना में एक शॉर्क ने बचा लिया। शार्क उसे निर्देशित करते हुए एक राहत नौका तक ले गई। पुलिस अधिकारी तोकई तीतोई अपने रिश्तेदार के साथ समुद्र में नौका सहित बह गया और उसे तट तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं मिल पा रहा था। उसके रिश्तेदार के शरीर में पानी कम हो जाने के कारण मौत हो गई।
अधिकारी को लगा कि वह खुद भी कुछ देर का ही मेहमान है। लेकिन एक शार्क से आमना सामना हो जाने पर उसे अभूतपूर्व ढंग से बचा लिया गया। डेली मेल के अनुसार मछली पकड़ने वाली एक नौका द्वारा मार्शल द्वीप लाए जाने के बाद तीतोई ने बताया कि मेरे पास से एक नौका गुजर जाने के बाद मैंने अपने बचने की सभी उम्मीदें छोड़ दी थीं कि तभी कुछ अद्भुत घटित हुआ।
अधिकारी ने कहा कि उसे अचानक कुछ उछाल सा महसूस हुआ। इस पर उसकी आंख खुली तो उसने देखा कि छह फुट लंबी एक शॉर्क उसकी नौका के इर्द गिर्द घूम रही थी। उन्होंने कहा कि शार्क की उछलकूद ने उसका ध्यान आकर्षित किया और वह जाग गया। तभी उसे एक नौका दिखी। वह अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर सका।
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इस पर सवार लोग उसे दूरबीन से देख रहे थे। तीतोई ने कहा कि मैं तुरंत तैरकर उस नौका तक पहुंच गया और उन्होंने मुझे ऊपर उठा लिया। यदि शार्क की वजह से मेरी आंख नहीं खुली होती तो इस नौका में सवार लोग सोचते कि मैं परेशानी में नहीं हूं और वे गुजर जाते। तीतोई अपने रिश्तेदार के साथ मायाना द्वीप स्थित अपने घर से तारावा की राजधानी किरीबाती रवाना हुआ था। लौटते समय उनकी नौका बह गई और जब उनकी आंख खुली तो वे मायाना क्षेत्र से काफी दूर हो चुके थे।
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अधिकारी को लगा कि वह खुद भी कुछ देर का ही मेहमान है। लेकिन एक शार्क से आमना सामना हो जाने पर उसे अभूतपूर्व ढंग से बचा लिया गया। डेली मेल के अनुसार मछली पकड़ने वाली एक नौका द्वारा मार्शल द्वीप लाए जाने के बाद तीतोई ने बताया कि मेरे पास से एक नौका गुजर जाने के बाद मैंने अपने बचने की सभी उम्मीदें छोड़ दी थीं कि तभी कुछ अद्भुत घटित हुआ।
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अधिकारी ने कहा कि उसे अचानक कुछ उछाल सा महसूस हुआ। इस पर उसकी आंख खुली तो उसने देखा कि छह फुट लंबी एक शॉर्क उसकी नौका के इर्द गिर्द घूम रही थी। उन्होंने कहा कि शार्क की उछलकूद ने उसका ध्यान आकर्षित किया और वह जाग गया। तभी उसे एक नौका दिखी। वह अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर सका।
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इस पर सवार लोग उसे दूरबीन से देख रहे थे। तीतोई ने कहा कि मैं तुरंत तैरकर उस नौका तक पहुंच गया और उन्होंने मुझे ऊपर उठा लिया। यदि शार्क की वजह से मेरी आंख नहीं खुली होती तो इस नौका में सवार लोग सोचते कि मैं परेशानी में नहीं हूं और वे गुजर जाते। तीतोई अपने रिश्तेदार के साथ मायाना द्वीप स्थित अपने घर से तारावा की राजधानी किरीबाती रवाना हुआ था। लौटते समय उनकी नौका बह गई और जब उनकी आंख खुली तो वे मायाना क्षेत्र से काफी दूर हो चुके थे।