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पूर्णिमा की रात, ‘चमकी’ पहन इठलाएगा ताज

Sat, 27 Oct 2012 12:57 PM IST
आगरा/इंटरनेट डेस्क।
आगरा/इंटरनेट डेस्क। Updated Sat, 27 Oct 2012 12:57 PM IST
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sharad poornima night tajmahal  will shine
एक तो खूबसूरत चांद,उस पर मदहोश कर देने वाली चांदनी रात। ऐसी रात में चांद चांदनी की ‘चमकी’ पहन इठलाए, तो कौन होगा जो उस अद्भुत नजारे को देखे बिना रहना चाहेगा। और दिन भी कौन सा, जब चांद सबसे अधिक चमकता है और ताज महल पर सीधी रोशनी डालता है।
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जी हां, शरद पूर्णिमा की रात जब चांद अपने पूरे शबाब पर होगा तो उस चमक चांदनी में ताज पर लगे पत्थर चम-चम अपनी चमक बिखरेंगे। ताज के गुंबद और मीनारों पर तारों की दुनिया सिमटती लगेगी। यूं तो चांदनी रात में संगमरमरी ताज की खूबसूरती में चार चांद लग ही जाते हैं लेकिन शरद पूर्णिमा पर यह चमक कुछ और ही होती है। हर पूर्णिमा पर होने वाले रात्रि दर्शन में इस बार यही खास बात है और पहले दिन की बुकिंग विंडो खुलते ही फुल हो गई। ऐसा तब है जब एक दिन में चार सौ पर्यटकों को रात्रि दर्शन कराया जाता है। इस बार सोमवार को शरद पूर्णिमा है। शरद पूर्णिमा पर शनिवार से बुधवार तक रात्रि दर्शन संभव है।
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बंदिशों की भी परवाह नहीं
धवल चांदनी की किरणों में नहाये ताज के अप्रतिम सौंदर्य को अपलक देखने की लालसा बंदिशों के बाद भी कम नहीं हुई है। नाइट विजन में एक निश्चित दूरी से ही ताज देखने की इजाजत है लेकिन यादों में बसा चमकी का मेला आज भी झिलमिलाते ताज को देखने के लिए बेकरार करता है।
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पांच दिन होता है रात्रि दर्शन
ताज का रात्रि दर्शन यूं तो हर माह पूर्णिमा के दो दिन पहले से दो दिन बाद तक कर सकते हैं। चांद उस समय पृथ्वी के पास होता है। बारिश के बाद मौसम भी सुहावना होता है। धूल कण दब चुके होते हैं, आसमान साफ होता है। वहीं बारिश के मौसम में ताज भी साफ हो चुका होता है। ऐसे में शरद पूर्णिमा पर यह दर्शन निराला हो जाता है।

वो चमकी, ये चमकी.....

ताज की चमकी के पीछे कोई पुरानी दास्तां नहीं बल्कि लोगों की दीवानगी है। बंदिशों के पहले जब ताज पूरी रात खुला करता था तो मध्य रात्रि का ताज देखने को मिल जाता था। उस दौरान मेला लगता था। चांद के गुंबद की सीध में आने के बाद उसकी किरणें ताज में लगे सेमी प्रीसियस स्टोन से परावर्तित होकर फैलती थीं। जब कोई पत्थर चमकता था तो लोगों के मुंह से निकलता था ‘वो चमकी अरे ये चमकी’। इसके बाद शरद पूर्णिमा की चांदनी से नहाए ताज को चमकी कहा जाने लगा।


ऐसे कर सकते हैं दर्शन
रात्रि दर्शन की टिकट माल रोड स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कार्यालय से मिलती है। संरक्षण सहायक मुनज्जर अली ने बताया कि एक रात में 50-50 सदस्यों के आठ ग्रुप को 30-30 मिनट का रात्रि दर्शन कराया जाता है। साढ़े आठ बजे पहला ग्रुप और रात 12 बजे आखिरी ग्रुप रात्रि दर्शन को जाता है। शरद पूर्णिमा के लिए बुकिंग 28 अक्टूबर को शुरू होगी।
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