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कुत्ता जिसने दुनिया को बचाया परमाणु युद्ध से
Updated Sat, 11 Jan 2014 01:16 PM IST
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शीतयुद्ध के दौरान सोवियत नेता ख्रुश्चेव और अमरीकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी नियमित रूप से पत्राचार कर रहे थे।
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दोनों देशों के बीच जारी शत्रुता के बीच इन दोनों नेताओं ने उपहारों का लेन-देन भी किया। इन उपहारों में पुशिंका नाम का कुत्ता भी शामिल था, जिसकी मा लाइका अंतरिक्ष में जाकर जीवित लौटने वाली पहली कुतिया थी।
जापान में अमरीका की राजदूत कैरोलिन कैनेडी कहती हैं, "मेरी मा ने मुझे एक मजेदार कहानी सुनाई थी।" वे करीब पचास साल पहले व्हाइट हाऊस में एक बच्ची के रूप में बडी हो रही थीं।
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कैरोलिन कैनेडी वियना में आयोजित एक सरकारी भोज के दौरान ख्रुश्चेव के बगल में बैठी थीं। वह ढेर सारी चीजों के बारे में लगातार बातें कर रही थीं, उन्होंने कुत्ते स्ट्रेलका के बारे में भी पूछा, जिसे रूस ने अंतरिक्ष में भेजा था। इस बातचीत के दौरान मेरी मा ने स्ट्रेका के पिल्लों के बारे में पूछा।
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कहां से आया पिल्ला
कुछ महीनों बाद मेरे घर एक पिल्ला आया और मेरे पिता को पता नहीं था कि वह कहा से आया है और उनको यकीन नहीं हो रहा था कि मेरी मा ने इसे मुमकिन बनाया है।
वह पिल्ला स्ट्रेलका का था जिसका नाम था पुशिंका, जिसे उसके आधिकारिक पंजीकरण प्रमाणपत्र में संकर प्रजाति का बताया गया था।
कैनेडी कहती हैं, "पुशिंका काफी आकर्षक और रोयेंदार थी, वास्तव में अपने रूसी नाम के अर्थ की तरह काफी नर्म रोयें वाली थी।"
कैनेडी ने ख्रुश्चेव को 21 जून 1961 के लिखे पत्र में सुंदर उपहार के लिए शुक्रिया कहा है।
इतिहासकार मार्टिन सैंडलेर ने कैनेडी के पत्रों का दो संग्रह प्रकाशित किया है। वह कहते हैं, "पत्रों में संवाद की गर्माहट काफी रोचक है। उन दोनों को पता है कि वे दुनिया के सबसे ताकतवर व्यक्ति हैं।"
लेकिन वह कहते हैं, "पूरे पत्राचार के दौरान दोनों एक-दूसरे पर हावी होने की कोशिश करते हैं।"
आगे निकलने की होड
कैनेडी साल 1960 के अंत तक चाद की धरती पर एक इंसान को उतारने की कोशिश के बाद काफी खुश थे। स्पुतनिक के जाने के बाद बाकी अमरीकियों की तरह वह खुशी से अभिभूत थे।
पुशिंका की मा स्ट्रेलका और एक अन्य कुत्ता बेल्का धरती से अंतरिक्ष में जाने वाले और जीवित रहने वाले पहले प्राणी थे। इससे यह तथ्य रेखांकित होता है कि सोवियत यूनियन अंतरिक्ष की दौड में अमरीका से काफी आगे था।
एक कर्मचारी ट्रैफ्स ब्रायन के मुताबिक, पुशिंका जल्दी ही व्हाइट हाऊस में पहुंचा दी गई थी।
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ब्रायन ने जॉन एफ कैनेडी प्रेसिडेंशियल लायब्रेरी एण्ड म्युजियम को बताया कि पुशिंका सीढियां चढकर कैरोलाइन प्लेहाऊस तक जा सकती थी।"
उन्होंने बताया, "राष्ट्रपति कैनेडी ने मुझसे पूछा कि मैंने उसे सीढियों पर चढना कैसे सिखाया? तो मैंने बताया कि हर स्टेप पर मूगफली रखकर उसे सीढियां चढना सिखाया। जब मैंने उन्हें तस्वीरें दिखायीं तो वो हस पडे थे।"
"उसे मूगफली मत खिलाओ"
ब्रायन ने बताया,"कैरोलिन ने मुझसे एक बार कहा कि पुशिंका को मूगफली मत खिलाओ। जानवरों के डॉक्टर का कहना है कि यह उसके लिए अच्छा नहीं है। तबसे मैंने उसे मूगफली खिलाना छोड दिया।"
राजदूत कैरोलिन ने बताया, ''कैनेडी के एक अन्य कुत्ते से पुशिंका को पिल्ले होने पर मैं बेहद खुश थी। मैंने उनको ब्लैकी, व्हाइट टिप्स, बटरफ्लाई और स्ट्रीकर जैसे नाम दिए।''
राष्ट्रपति कैनेडी उन्हें 'द पपनिक्स' कहकर बुलाते थे। ब्रायन ने बताया कि उन्हें पिल्लों के बारे में सवाल पूछना अच्छा लगता था। वो कई सवाल पूछते थे जैसे, "कब तक उनकी आखें बंद रहेंगी? कब वे खाना शुरू करेंगे? कितने दिनों में वे चलने लगेंगे? वे घास के लॉन में खेलने कब तर जा सकेंगे? उनके बाल छोटे होंगे या बडे?"
राष्ट्रपति ने ब्रायन से कहा कि एक दिन वह पुशिंका और उसके पिल्लों को घर लाएं ताकि बच्चों को हैरान किया जा सके।
उन पिल्लों को पाने के लिए करीब पाच हजार लोगों ने व्हाइट हाउस को पत्र लिखा। इसके कारण बटरफ्लाई और स्ट्रीकर को मिडवेस्ट के बच्चों को दे दिया गया, जबकि टिप्स और ब्लैकी को परिवार के मित्रों के घर पहुंचा दिया गया।
उपहार और कूटनीति
पुशिंका ने परिवार के लोगों के साथ खेलने का समय कम कर दिया था।
जापान में राजूदत रहीं कैरोलिन ने बताया कि पुशिंका को एक साइंस लैब में विकसित किया गया था।
इस बीच सर्गेई ख्रुश्चेव और कैनेडी के बीच लगातार बातचीत आगे बढ रही थी जो अक्सर काफी गुप्त तरीके से होती थी।
निकिता ख्रुश्चेव के बेटे, सर्गेई ख्रुश्चेव जो अमरीका में रहते हैं उन्होंने बताया, "उनके पिता ने सोचा कि यह उपहार परिवार के लिए बेहद सुंदर होगा और राजनीति के लिए भी अच्छा होगा।"
उन्होंने कहा, "मेरे पिता लोगों से नियमित रूप से संवाद करते थे क्योंकि वो तनाव को कम करना चाहते थे और नाभिकीय परीक्षणों को रोकना चाहते थे।"
सर्गेई ख्रुश्चेव ने उन मीडिया खबरों को खारिज कर दिया कि उनके पिता कैनेडी को कमजोर और अनुभवहीन समझते थे। उन्होंने कहा कि वास्तव में उनके पिता साल 1961 में कैनेडी की तरफ से वियना वार्ता तोडने की बात न कहने के कारण काफी सम्मान करते थे।
नाभिकीय विनाश का खतरा
वियना वार्ता के ठीक 16 महीनों बाद अक्टूबर 1962 में अमरीका और सोवियत यूनियन परमाणु युद्ध की कगार पर खडे थे, इसके थोडे दिनों बाद पुशिंका को अमरीका पहुंचाया गया था।
अमरीका के पास तस्वीरें थीं कि रूस की मिसाइलें क्यूबा में तैनात थीं और ये हथियार वॉशिंगटन और अमरीका के अन्य शहरों को तबाह करने में सक्षम थीं।
आखिर में ख्रुश्चेव मिसाइलों को वापस लेने पर सहमत हो गए और मिसाइलों को सोवियत यूनियन भेज दिया गया था।
इसके बदले में अमरीका ने वादा किया था कि वह क्यूबा पर हमला नहीं करेगा।
सैंडलर मानते हैं कि दोनों नेताओं के बीच होने वाले संचार और उपहारों के आदान-प्रदान (जिसमें यह कुत्ता भी शामिल है) से काफी फर्क पडा।
आखिर में वह कहते हैं कि इसने दुनिया को नाभिकीय विनाश से बचा लिया।