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'निराशावादी' होने के भी हैं कई बड़े फायदे
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
Updated Thu, 28 Feb 2013 11:15 AM IST
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अगर आप सोचते हैं कि पॉजिटिव होना ही सबसे अच्छी बात है तो आपकी सोच गलत साबित होने जा रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि निराशावादी लोग और नकारात्मक सोच वाले लोग ज्यादा लंबी उम्र जीते हैं। हालांकि कई लोगों को ये अजीब लग सकता है लेकिन यह सच है।
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जर्मनी के एरलेंग न्यूरमबर्ग यूनिवर्सिटी द्वारा हाल ही में कराए गए एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार सुखद और संतुष्ट भविष्य के प्रति आशंकित रहने वाले ही दरअसल लोग ज्यादा जीते हैं। आप गौर करेंगे कि बात बात पर नए जमाने को कोसने वाले आपके आस पास के बुजुर्गो की उम्र कितनी ज्यादा है।
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अमेरिकन साइकोलॉजी एसोसिएशन द्वारा जारी इस रिपोर्ट में करीब 40,000 लोगों की सोच और विचार पर अध्ययन किया गया। अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकला कि भविष्य के प्रति आशंकित लोग अपने जीवन में काफी सोचसमझ कर फैसले लेते हैं और फूंक फूंक कर कदम रखते हैं। ऐसे लोग अपनी सेहत पर काफी ध्यान देते हैं और नियमों का पालन करते हैं। यही इनके लंबे जीवन का राज है।
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इस रिसर्च में शामिल किए गए लोगों को 19, 39, 40, 64 और 65 वर्ग उम्र के लोगों के ग्रुप में बांटा गया। इनसे आने वाले पांच सालों में बदलाव के बारे में सवाल पूछे गए। इनसे सवाल किया गया कि क्या वो पांच साल बाद के समाज और माहौल से संतुष्ट होंगे। अगर होंगे तो कितने संतुष्ट होंगे।
पांच साल बाद इनसे दोबारा बातचीत की गई। पांच साल पहले पूछे गए सवालों के जवाबों में ज्यादा उम्र वर्ग के लोगों की सोच मिलती जुलती पाई गई। पांच सालों के दौरान हर प्रतिभागी का संतुष्टि स्तर चैक किया गया।
इससे पता चला कि 64 और 65 वर्ग के ग्रुप ने पांच साल पहले भविष्य को अंडरएस्टिमेड किया था। युवा वर्ग के लोगों ने पांच साल के भविष्य को ओवरएसटिमेट किया था। अब दोनों ही ग्रुपों के रहन सहन और सेहत संबंधी जांच की गई तो पता चला कि बुगुर्ज ग्रुप को इस दौरान सावधानी बरतने के कारण कम नुकसान पहुंचा।
इस रिसर्च से यह पता चला कि भविष्य को लेकर अति आशान्वित लोगों के जीवन में अस्थिरता आई और वो बीमारियों का शिकार बने। जब भविष्य के प्रति सशंकित लोगों का जीवन दूसरे ग्रुप की अपेक्षा स्थिर और सुंतलित रहा।