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मानो या न मानो लेकिन 'इतने बुरे' नहीं हैं हम
वाशिंगटन।
Updated Sat, 23 Feb 2013 10:31 AM IST
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ये बात साफ तौर पर मानी जा सकती है कि आज का इंसान पहले की अपेक्षा ज्यादा स्वार्थी हो गया है लेकिन प्रकृति प्रदत्त कुछ स्वभाव अभी भी उसके अंदर समाहित हैं। ऐसा ही एक स्वभाव है दूसरे की मदद करके खुश होना। एक कतरफ जहां हम ये कहते हैं कि कोई किसी की मदद नहीं करना चाहता, शोध बताता है कि दूसरों की मदद करके लोगों को खुशी मिलती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए एक शोध में यह बात सामने आई है। शोध के मुताबिक यदि हम अपने फायदे के लिए खर्च करने की बजाय किसी अन्य व्यक्ति के लिए रुपये खर्च करते हैं तो हमें ज्यादा खुशी महसूस होती है। भारत सहित दुनिया के कई अमीर और गरीब देशों के लोगों पर किए गए इस शोध में यह बात सामने आई है।
कनाडा की साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी की शोध टीम की प्रमुख लारा एक्निन ने बताया कि हमारे शोध निष्कर्ष बताते हैं कि मनुष्य के स्वभाव में दूसरों की मदद करना मनोवैज्ञानिक रूप से सबसे प्रबल होता है। उन्होंने बताया कि शोध में यह सामने आया है कि लोग अपने लिए खर्च करने की बजाय दूसरों पर खर्च करने में ज्यादा खुशी महसूस करते हैं। ऐसा करना उनकी मानवीयता को परिलक्षित करता है क्योंकि मानव स्वभाव में दूसरों की मदद करना मनोवैज्ञानिक रूप से एक आवश्यक घटक के रूप में शामिल है।
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फ्रेजर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की यह शोध रिपोर्ट अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की पत्रिका में प्रकाशित हुई है। शोध रिपोर्ट के मुताबिक 2006-2008 के गैलप विश्व जनसंख्या आंकड़ों में शामिल 136 में से 120 देशों में लोग एक-दूसरे की मदद करके और खुद की बजाय दूसरों पर रुपये खर्च करके ज्यादा खुश होते हैं और सकारात्मक संबंध बनाए रखने में यकीन रखते हैं। इस शोध के लिए किए गए सर्वे में कई देशोें के 38 वर्ष की औसत उम्र के 2,34,917 लोगों को शामिल किया गया।
शोध के दौरान दूसरों की मदद करने का गुण दुनिया के हर हिस्से के लोगों के अंदर देखने को मिला। फिर चाहे वो गरीब देशों के लोग हों या धनी देशों के, कम आमदनी के बावजूद भी लोग दूसरों को खुशी देने में ज्यादा अच्छा महसूस करते हैं।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए एक शोध में यह बात सामने आई है। शोध के मुताबिक यदि हम अपने फायदे के लिए खर्च करने की बजाय किसी अन्य व्यक्ति के लिए रुपये खर्च करते हैं तो हमें ज्यादा खुशी महसूस होती है। भारत सहित दुनिया के कई अमीर और गरीब देशों के लोगों पर किए गए इस शोध में यह बात सामने आई है।
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कनाडा की साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी की शोध टीम की प्रमुख लारा एक्निन ने बताया कि हमारे शोध निष्कर्ष बताते हैं कि मनुष्य के स्वभाव में दूसरों की मदद करना मनोवैज्ञानिक रूप से सबसे प्रबल होता है। उन्होंने बताया कि शोध में यह सामने आया है कि लोग अपने लिए खर्च करने की बजाय दूसरों पर खर्च करने में ज्यादा खुशी महसूस करते हैं। ऐसा करना उनकी मानवीयता को परिलक्षित करता है क्योंकि मानव स्वभाव में दूसरों की मदद करना मनोवैज्ञानिक रूप से एक आवश्यक घटक के रूप में शामिल है।
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फ्रेजर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की यह शोध रिपोर्ट अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की पत्रिका में प्रकाशित हुई है। शोध रिपोर्ट के मुताबिक 2006-2008 के गैलप विश्व जनसंख्या आंकड़ों में शामिल 136 में से 120 देशों में लोग एक-दूसरे की मदद करके और खुद की बजाय दूसरों पर रुपये खर्च करके ज्यादा खुश होते हैं और सकारात्मक संबंध बनाए रखने में यकीन रखते हैं। इस शोध के लिए किए गए सर्वे में कई देशोें के 38 वर्ष की औसत उम्र के 2,34,917 लोगों को शामिल किया गया।
शोध के दौरान दूसरों की मदद करने का गुण दुनिया के हर हिस्से के लोगों के अंदर देखने को मिला। फिर चाहे वो गरीब देशों के लोग हों या धनी देशों के, कम आमदनी के बावजूद भी लोग दूसरों को खुशी देने में ज्यादा अच्छा महसूस करते हैं।