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क्या खुल सकेगा 23 साल पहले की रात का रहस्य?

Mon, 25 Mar 2013 11:00 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क। Updated Mon, 25 Mar 2013 11:00 AM IST
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no clue of boston theft, 23 year ago stealing of paintings
कहते हैं कि हर चोरी के बाद चोर कुछ सुराग छोड़ जाते हैं। लेकिन बोस्टन के इसाबेला स्टेवार्ट गार्डनर म्यूजियम से 23 साल पहले हुई चोरी के सुराग अब तक नहीं मिले थे। उस रात म्यूजियम से 13 पेंटिंग्स चोरी हुईं थी। पिछले 23 सालों से एफबीआई की बोस्टन टीम इस चोरी की जांच करने में जुटी है।
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तमाम गवाहों और संदिग्धों से पूछताछ के बाद भी अब तक कोई ऐसा सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे इन पेंटिंग्स के बारे में कुछ भी सही-सही अनुमान लगाया जा सके। लेकिन इतने सालों बाद इस मामले में एफबीआई के एक हालिया जारी बयान ने फिर से कलाप्रेमियों को एक उम्मीद बंधाई है।
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एफबीआई अधिकारियों के मुताबिक यह पेंटिंग्स कनेक्टिकट और फिलाडेलफिया के रास्ते ले जाई गईं थी। हालांकि चोरों की पहचान के बारे में खुलासा करने से एफबीआई ने इनकार किया है। उनका कहना है कि अभी जांच की जा रही है। एफबीआई ने लोगों को जागरूक करने के लिए एक वेबसाइट www.FBI.gov/gardner भी तैयार की है।
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इस जागरुकता कैंपेन में कनेक्टिकट और फिलाडेलफिया में चोरी के संबंध में विज्ञापन बोर्ड भी लगाए जाएंगे। इसमें लोगों को चोरी से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी मिलते ही तुरंत सूचित करने की बात कही गई है। म्यूजियम की तरफ से सूचना देने वाले व्यक्ति के लिए 5 मिलियन डॉलर का ईनाम भी घोषित किया गया है।

एफबीआई के बोस्टन ऑफिस के स्पेशल एजेंट रिचर्ड डेसलॉरियर्स के मुताबिक अधिकारियों को पेंटिंग्स के बारे में कोई पुख्ता सूचना फिलहाल नहीं मिली है। यह चोरी 18 मार्च 1990 को सुबह के 1 बजकर 20 मिनट पर हुई थी। उस वक्त ड्यूटी पर तैनात वॉचमैन को इंटरकॉम पर म्यूजियम में कुछ गड़बड़ होने की सूचना मिली। दो लोग पुलिस के वेश में जांच के लिए आए और गार्ड ने उन्हें अंदर जाने दिया। दोनों ने गार्ड और उसके सहकर्मी को काबू में कर उनके हाथ-पैर बांधकर उन्हें बेसमेंट में बंद कर दिया।

81 मिनट के अंदर पुलिस के वेश में आए उन दोनों चोरों ने म्यूजियम में 13 चीजें चुरा लीं। इनमें डच पेंटर रेमब्रेंड की दो ऑइल पेंटिंग्स, वरमीर, मेनेट और गोवेर्ट फ्लिंक के बनाए पोर्टेट, डेगास के पांच स्केच और तीन दूसरी वस्तुएं शामिल हैं। एफबीआई के मुताबिक इन वस्तुओं की कुल कीमत 300 मिलियन डॉलर है।


एफबीआई की जांच के अनुसार इस चोरी में सबसे अहम व्यक्ति है रॉबर्ट गुआरेंटे। यह एक माफिया डॉन था। साल 2004 में इस 65 वर्षीय माफिया डॉन की मौत हो चुकी है। बेशक जांच में कुछ खास सामने न आया हो, लेकिन कला के इतिहास में यह अब तक की एकमात्र सबसे बड़ी चोरी है।
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